विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में हरियाणा सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में योग को केवल एक औपचारिकता तक सीमित न रखकर इसे बच्चों की दैनिक जीवनशैली और शिक्षा प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा बनाने की पुख्ता तैयारी कर ली गई है। इसी कड़ी में राज्यभर के 10,500 शिक्षकों को पेशेवर योग शिक्षा का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, ताकि वे छात्र-छात्राओं को इस प्राचीन भारतीय विद्या की सूक्ष्म तकनीकों से भली-भांति अवगत करा सकें।
यह पूरा अभियान हरियाणा योग आयोग के निर्देशन में प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। चयनित शिक्षकों को देश के प्रतिष्ठित पतंजलि विश्वविद्यालय के जरिए एक महीने का विशेष पाठ्यक्रम और प्रमाणन सौंपा जाएगा। इसके बाद ये शिक्षक अपनी-अपनी शिक्षण संस्थाओं में लौटकर योग पाठ्यक्रम को अत्यधिक प्रभावी और व्यावहारिक रूप से लागू करेंगे, जिससे शुरुआती स्तर से ही बच्चों की बौद्धिक और शारीरिक क्षमता में वृद्धि हो सके।
शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक पाठ्यक्रम का विस्तृत खाका
| प्रशिक्षण का विवरण | प्रमुख बिंदु एवं आंकड़े |
|---|---|
| प्रशिक्षित किए जाने वाले शिक्षकों की संख्या | 10,500 योग शिक्षक |
| प्रशिक्षण प्रदान करने वाली संस्था | पतंजलि विश्वविद्यालय |
| प्रशिक्षण की अवधि | एक महीने का विशेष कोर्स एवं प्रमाणन |
| लक्ष्य वर्ष और पदक का पैमाना | वर्ष 2036 ओलंपिक में 28 पदक |
इस महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर रूपरेखा तैयार कर ली गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि जब तक बच्चों को पढ़ाने वाले मार्गदर्शक खुद योग की वैज्ञानिक और व्यावहारिक बारीकियों से पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं होंगे, तब तक इसका सही प्रतिफल धरातल पर नहीं उतर सकेगा। एक महीने के इस कठोर प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को आसन, प्राणायाम, ध्यान और बच्चों के मनोविज्ञान के अनुरूप योग सिखाने की कला में पारंगत किया जाएगा।
"बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और बेहतर बुद्धि के लिए योग बेहद जरूरी है। योग शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए जरूरी है कि बच्चों को योग सिखाने वाले शिक्षक खुद भी पूरी तरह प्रशिक्षित हों।" - महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री, हरियाणा
खेलों से जुड़ाव और ओलंपिक में पदक जीतने का वृहद लक्ष्य
शिक्षा के साथ-साथ योग को प्रतिस्पर्धी खेलों के फलक पर स्थापित करने के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं। स्कूल गेम्स में पहले ही योगासन को आधिकारिक तौर पर स्थान दिया जा चुका है, जबकि विश्वविद्यालयों में पिछले पांच वर्षों से लगातार योगासन प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी की खेल प्रतिभा को पहचानना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक मजबूत मंच मुहैया कराना है, ताकि वे भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार कर सकें।
हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष आचार्य डॉ. जयदीप आर्य ने भविष्य की खेल संभावनाओं का जिक्र करते हुए एक बड़ा लक्ष्य देश के सामने रखा है। उनका मानना है कि यदि योजनाबद्ध तरीके से अभ्यास और प्रतियोगिताओं को आगे बढ़ाया जाए, तो वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों में भारत योगासन के माध्यम से 28 पदक जीतने की क्षमता रखता है। हरियाणा के खिलाड़ी पहले ही कुश्ती, भाला फेंक और भारोत्तोलन जैसे खेलों में अपनी श्रेष्ठता साबित कर चुके हैं, और अब प्रशासन का यह प्रयास है कि भविष्य में योगासन के जरिए मिलने वाले कुल पदकों में अकेले हरियाणा की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंचाई जाए।





