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CGPSC Success Story: पिता का सपना पूरा करने के लिए छोड़ा सोशल मीडिया, महासमुंद की नंदनी साहू बनीं डिप्टी कलेक्टर

महासमुंद की नंदनी साहू ने CGPSC में 5वीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर का पद पाया। पिता के निधन के बाद मां के साथ संघर्ष कर हासिल की यह बड़ी कामयाबी।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
23 अक्टूबर 2026 को 07:37 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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CGPSC Success Story: पिता का सपना पूरा करने के लिए छोड़ा सोशल मीडिया, महासमुंद की नंदनी साहू बनीं डिप्टी कलेक्टर
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •महासमुंद के छोटे से गांव की नंदनी साहू ने CGPSC परीक्षा में प्रदेश भर में 5वीं रैंक हासिल की।
  • •दिवंगत पिता मेघनाथ साहू के सपने को साकार करने के लिए 3 साल तक सोशल मीडिया से पूरी तरह बनाई दूरी।
  • •सफलता के लिए साल 2019 से मां रामप्यारी साहू के साथ बिलासपुर में किराए के मकान में रहकर की कठिन तपस्या।
  • •पहले प्रयास में 179वीं रैंक मिलने पर निराश होने के बजाय अपनी कमियों पर काम कर तीसरे प्रयास में पाया सर्वोच्च स्थान।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के परिणामों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और परिवार का संबल साथ हो, तो अभावों के बीच भी सफलता का आकाश छुआ जा सकता है। महासमुंद जिले के एक अत्यंत साधारण ग्रामीण परिवेश से आने वाली नंदनी साहू की कहानी आज देश भर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है, जो संसाधनों की कमी या व्यक्तिगत दुखों के कारण अपने लक्ष्यों से पीछे हट जाते हैं। नंदनी ने न केवल राज्य स्तर पर 5वीं रैंक हासिल की है, बल्कि डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित होकर अपने दिवंगत पिता के उस अधूरे सपने को भी जीवित कर दिया है, जिसे उन्होंने अपनी आंखों में संजोया था।

नंदनी की यह उपलब्धि केवल एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बेटी के अपने पिता के प्रति समर्पण और एक मां के असीम त्याग की विजय गाथा है। महासमुंद के एक छोटे से गांव में पली-बढ़ी नंदनी के लिए यह सफर आसान नहीं था। जब वह अपनी तैयारी के शुरुआती दौर में थीं, तभी उनके पिता मेघनाथ साहू का निधन हो गया। पिता के साये के बिना एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बड़े सपने देखना जोखिम भरा था, लेकिन नंदनी ने अपने आंसुओं को अपनी शक्ति बनाने का निर्णय लिया।

संघर्ष की नींव और मां का अटूट साथ

नंदनी साहू के इस गौरवपूर्ण सफर में उनकी माता रामप्यारी साहू की भूमिका एक सेनापति की तरह रही है। साल 2019 में जब नंदनी ने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का मन बनाया, तो उनकी मां ने गांव की सुख-सुविधाएं छोड़कर बेटी के साथ बिलासपुर जाने का कठिन फैसला लिया। बिलासपुर में एक छोटे से किराए के मकान को उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया। अपनी बेटी की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसके लिए रामप्यारी साहू ने न केवल घर की जिम्मेदारियां संभालीं, बल्कि नंदनी के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार किया जहां वह एकाग्र होकर केवल अपनी किताबों पर ध्यान केंद्रित कर सके।

विवरणमहत्वपूर्ण जानकारी
अभ्यर्थी का नामनंदनी साहू
गृह जनपदमहासमुंद, छत्तीसगढ़
परीक्षा का नामछत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC)
प्राप्त रैंकप्रदेश में 5वां स्थान
चयनित पदडिप्टी कलेक्टर
तैयारी का केंद्रबिलासपुर (किराए का आवास)
सफलता का मंत्रसोशल मीडिया का त्याग और निरंतरता

विफलता को बनाया सीढ़ी: पहले प्रयास से पांचवीं रैंक तक

नंदनी की सफलता रातों-रात नहीं मिली है। उनके इस सफर में असफलताओं के कड़वे अनुभव भी शामिल रहे हैं। जब उन्होंने पहली बार सीजीपीएससी की परीक्षा दी, तो उन्हें 179वीं रैंक प्राप्त हुई थी। हालांकि यह रैंक भी सम्मानजनक थी, लेकिन उनका लक्ष्य डिप्टी कलेक्टर बनना था। इस हार ने नंदनी को कमजोर करने के बजाय उन्हें अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने अपनी पिछली गलतियों का बारीकी से विश्लेषण किया और यह समझा कि प्रशासनिक सेवा के लिए केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि सटीक लेखन शैली और धैर्य की भी आवश्यकता होती है।

"मेरे पिता मेघनाथ साहू का हमेशा से यह सपना था कि मैं एक बड़ी प्रशासनिक अधिकारी बनकर समाज की सेवा करूं। उनके जाने के बाद मेरा केवल एक ही लक्ष्य था कि किसी भी तरह उनकी इच्छा को पूरा कर सकूं। आज जब मुझे 5वीं रैंक मिली है, तो मुझे विश्वास है कि वह जहां भी होंगे, उन्हें मुझ पर गर्व होगा।" - नंदनी साहू

डिजिटल उपवास: 3 साल तक सोशल मीडिया से दूरी

आज के दौर में जहां युवा अपना अधिकांश समय स्मार्टफोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यतीत करते हैं, वहीं नंदनी साहू ने एक कड़ा अनुशासन अपनाया। उन्होंने अपनी तैयारी के पिछले 3 वर्षों के दौरान खुद को फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह अलग कर लिया। उनका मानना था कि सोशल मीडिया न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि यह मानसिक एकाग्रता को भी भंग करता है। 'डिजिटल उपवास' के इस निर्णय ने उन्हें अपनी पाठ्यपुस्तकों और नोट्स के साथ अधिक समय बिताने में मदद की, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

स्थानीय जनजीवन और युवाओं पर प्रभाव

नंदनी साहू की इस उपलब्धि ने महासमुंद जिले सहित पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है। विशेष रूप से हरियाणा और उत्तर भारत के उन क्षेत्रों में जहां सिविल सेवाओं का क्रेज बहुत अधिक है, नंदनी की कहानी यह संदेश देती है कि कोचिंग संस्थानों की चकाचौंध से ज्यादा आपकी अपनी मेहनत और एकाग्रता मायने रखती है। उनके गांव में आज उत्सव का माहौल है और स्थानीय नागरिक उन्हें अपनी बेटियों के लिए रोल मॉडल मान रहे हैं।

प्रशासनिक दृष्टिकोण और आगामी कदम

नंदनी अब जल्द ही प्रशासनिक प्रशिक्षण के लिए रवाना होंगी। डिप्टी कलेक्टर के रूप में उनकी प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में कार्य करने की है। प्रशासन का मानना है कि नंदनी जैसे जमीनी स्तर से जुड़े अधिकारियों के आने से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक संवेदनशीलता के साथ हो सकेगा। उनकी यह जीत यह भी दर्शाती है कि हिंदी माध्यम और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र भी राष्ट्रीय और राज्य स्तर की कठिनतम परीक्षाओं में शीर्ष स्थान प्राप्त कर सकते हैं।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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