हरियाणा की पावन धरा अपनी उन्नत कृषि और बेमिसाल पशुधन के लिए विश्वभर में विख्यात है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए झज्जर जिले के हसनपुर में आयोजित हालिया पशु मेले में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने न केवल पशुपालकों बल्कि आम जनता को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। मेले का मुख्य आकर्षण पानीपत जिले के गांव डिडवाड़ी निवासी और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित प्रगतिशील किसान नरेंद्र सिंह का मुर्रा नस्ल का झोटा रहा, जिसका नाम 'विधायक' रखा गया है। इस झोटे की भव्यता और इसकी कीमत की चर्चा अब पूरे प्रदेश की गलियों से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक हो रही है।
15 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत वाला यह झोटा किसी बेशकीमती संपत्ति से कम नहीं है। यदि इस राशि की तुलना की जाए, तो इतने में एक छोटा निजी जेट विमान, एक आधुनिक हेलीकॉप्टर या फिर दुनिया की सबसे विलासी कारों में शुमार 'रॉल्स-रॉयस कलिनन सीरीज-2' खरीदी जा सकती है। 'विधायक' नाम का यह झोटा अपनी कद-काठी और शाही ठाट-बाट के कारण मेले में आकर्षण का केंद्र बना रहा। इसे देखने के लिए न केवल हरियाणा, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी पशु प्रेमी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
विधायक झोटे की विशेषताएं और उपलब्धियां
पद्मश्री नरेंद्र सिंह के अनुसार, 'विधायक' की आयु वर्तमान में साढ़े पांच वर्ष है और इसकी ऊंचाई लगभग 5.5 फीट है। यह केवल अपनी कीमत के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी उपलब्धियों के लिए भी जाना जाता है। अब तक इसने देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित 23 पशु प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। इसकी शारीरिक बनावट और मुर्रा नस्ल के शुद्ध लक्षणों ने इसे विशेषज्ञों की पहली पसंद बना दिया है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| पशु का नाम | विधायक (Vidhayak) |
| मालिक का नाम | नरेंद्र सिंह (पद्मश्री सम्मानित) |
| निवासी | गांव डिडवाड़ी, जिला पानीपत |
| नस्ल | शुद्ध मुर्रा (Murrah) |
| अनुमानित मूल्य | 15 करोड़ रुपये |
| कुल पुरस्कार | 23 स्वर्ण पदक / प्रथम स्थान |
| ऊंचाई | 5.5 फीट |
| आहार | काजू, बादाम, अखरोट, दूध और हरा चारा |
शाही खान-पान और रखरखाव पर विशेष ध्यान
इस अनमोल पशु का रखरखाव भी किसी राजकुमार की तरह किया जाता है। 'विधायक' की दैनिक डाइट में केवल साधारण चारा ही शामिल नहीं है, बल्कि उसे ऊर्जावान और स्वस्थ रखने के लिए काजू, बादाम और अखरोट जैसे महंगे सूखे मेवे खिलाए जाते हैं। नरेंद्र सिंह बताते हैं कि पशु की गुणवत्ता उसके आहार और उसकी देखभाल पर निर्भर करती है। यही कारण है कि 'विधायक' का स्वास्थ्य और उसकी चमक देखते ही बनती है। पशु को नियमित रूप से नहलाने, मालिश करने और टहलाने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है।
नस्ल सुधार में क्रांतिकारी योगदान
पशुपालन के क्षेत्र में 'विधायक' का महत्व केवल मेलों की शोभा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हरियाणा के पशुधन की नस्ल सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह झोटा अत्यंत उत्पादक है। यह हर चौथे दिन लगभग 600 सीमन (Semen) डोज प्रदान करता है। इस सीमन का उपयोग कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से अन्य पशुपालकों की भैंसों की नस्ल सुधारने के लिए किया जाता है। इससे आने वाली पीढ़ी के पशु भी उच्च गुणवत्ता वाले और अधिक दुग्ध उत्पादक होते हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है।
"पशुपालन केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है। 'विधायक' जैसे पशु तैयार करने के पीछे वर्षों की मेहनत और समर्पण होता है। हमारा उद्देश्य हरियाणा की मुर्रा नस्ल को वैश्विक स्तर पर नंबर-1 बनाए रखना है।" - नरेंद्र सिंह, पद्मश्री विजेता किसान
स्थानीय अर्थव्यवस्था और पशुपालन पर प्रभाव
नरेंद्र सिंह जैसे किसानों की सफलता हरियाणा के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। 2019 में पशुपालन के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा था। 'विधायक' जैसे पशुओं की प्रदर्शनी से स्थानीय स्तर पर पशु मेलों की प्रासंगिकता बढ़ती है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। जब एक किसान का पशु करोड़ों की कीमत पाता है, तो यह संदेश जाता है कि आधुनिक तकनीकों और बेहतर देखभाल के जरिए पशुपालन को एक अत्यंत लाभकारी उद्यम बनाया जा सकता है।
भावी योजनाएं और प्रशासनिक दृष्टिकोण
पशुपालन विभाग के अधिकारी भी 'विधायक' जैसे पशुओं की सराहना करते हैं। विभाग का मानना है कि ऐसे उच्च श्रेणी के पशुओं का डेटाबेस तैयार करना और उनके सीमन का उचित वितरण सुनिश्चित करना प्रदेश के डेयरी क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। आने वाले समय में नरेंद्र सिंह इसे और भी कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ले जाने की योजना बना रहे हैं। प्रशासन भी ऐसे प्रगतिशील किसानों को मेलों के माध्यम से मंच प्रदान कर रहा है ताकि हरियाणा का 'काला सोना' (मुर्रा नस्ल) पूरी दुनिया में अपनी धाक जमा सके।





