हरियाणा के सिरसा जिले के अंतर्गत आने वाले ऐलनाबाद क्षेत्र से एक अत्यंत दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। करीब छह दिनों से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता चल रही इलेक्ट्रोनिक्स कारोबारी भरत सिंह सहारण की 43 वर्षीय पत्नी मंजू का शव आखिरकार राजकनाल से बरामद कर लिया गया है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है, क्योंकि इससे पहले इसी परिवार के मुखिया और उनकी मासूम बेटी के शव भी नहर से मिल चुके थे। जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की ओर से लगातार चलाए जा रहे व्यापक खोज अभियान के बाद महिला का शव 693 हेड नंबर के समीप से बाहर निकाला गया, जिसके बाद से क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब 16 अक्टूबर की दोपहर को कारोबारी भरत सिंह अपनी दुकान के सिलसिले में निकले थे, और कुछ ही देर बाद उनकी पत्नी मंजू तथा बेटी लता भी घर से बाहर गईं थीं। इसके बाद से तीनों का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था और उनके मोबाइल फोन भी घर पर ही पाए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अमले ने अनहोनी की आशंका के चलते तुरंत नहरों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया था। प्रारंभिक दो दिनों के भीतर ही राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र के अंतर्गत डबली गांव के पास राजकनाल से पिता और पुत्री के शव तैरते हुए बरामद कर लिए गए थे, जिनका अंतिम संस्कार भी सोमवार को अत्यंत गमगीन माहौल में संपन्न हो चुका था।
सघन गोताखोर अभियान और खोजबीन का विस्तृत घटनाक्रम
लापता महिला की तलाश के लिए प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। शुरुआत में छह से सात गोताखोरों को इस काम में लगाया गया था, लेकिन जब तीन दिनों तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी तो अभियान का दायरा और संसाधन दोनों बढ़ा दिए गए। मसीतां हेड से लेकर सूरतगढ़ तक के विस्तृत क्षेत्र में पानी के भीतर तलाशी ली गई। प्रशासन ने गोताखोरों की संख्या बढ़ाकर 12 से 13 कर दी और अधिकांश कर्मियों को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ नहर की तली तक उतारा गया ताकि किसी भी छिपे हुए सुराग को ढूंढा जा सके।
राजकनाल से निकलने वाली विभिन्न उप-नहरों और आसपास के ग्रामीण इलाकों में संभावित बहाव को देखते हुए पुलिस ने व्यापक मुनादी भी करवाई थी। स्थानीय ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि, सरपंच और करीब सौ से अधिक ग्रामीण लगातार राहत कार्यों में डटे हुए थे और राजस्थान पुलिस तथा स्थानीय नागरिक सुरक्षा मोर्चा की टीमों ने भी इस चुनौतीपूर्ण अभियान में पूरा सहयोग प्रदान किया। आखिरकार, बुधवार दोपहर को कड़े संघर्ष के बाद गोताखोरों की टीम ने मंजू के शव को पानी से बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की।
| घटना के प्रमुख पहलू | विवरण व तथ्य |
|---|---|
| प्रभावित परिवार | इलेक्ट्रोनिक्स कारोबारी भरत सिंह सहारण और उनका परिवार |
| लापता होने की तिथि | 16 अक्टूबर (दोपहर के समय) |
| शव बरामदगी का स्थान | राजकनाल, हेड नंबर 693 के समीप |
| खोज अभियान की अवधि | लगातार 6 दिन (विशेषकर अंतिम 3 दिन गहन सर्च) |
| सहयोगी दल | स्थानीय पुलिस, राजस्थान पुलिस, गोताखोर टीम व नागरिक सुरक्षा मोर्चा |
पुलिस प्रशासन की भूमिका और आगामी कानूनी प्रक्रिया
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू कर दिया है। ऐलनाबाद थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह ने मीडिया को दी गई जानकारी में बताया कि महिला के शव को बरामद करने के बाद तमाम कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। शव को ऐलनाबाद लाया गया है जहां परिजनों के आधिकारिक बयान दर्ज करने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। पुलिस यह भी स्पष्ट कर रही है कि परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन को जांच के दायरे में रखा गया है ताकि कॉल डिटेल्स और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के जरिए इस बात का पता लगाया जा सके कि आखिर उस दिन ऐसी कौन सी परिस्थितियां बनीं जिनके कारण यह पूरा परिवार इस अनहोनी का शिकार हो गया।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि पानी में लंबे समय तक रहने के कारण शव अक्सर कुछ दिनों बाद सतह पर आते हैं या फिर जलकुंभी व झाड़ियों में फंस जाते हैं। इसी कारण से तलाशी अभियान को अत्यधिक सावधानी और तकनीकी उपकरणों की मदद से चलाना पड़ा। फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के नतीजे आने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम के वास्तविक कारणों पर से पर्दा उठ सकेगा, हालांकि प्रारंभिक तौर पर इसे नहर में गिरने का गंभीर मामला मानकर ही तफ्तीश को आगे बढ़ाया जा रहा है।
"कारोबारी की पत्नी का शव राजकनाल से बरामद कर लिया गया है। पुलिस नियमानुसार सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर रही है, जिसके पश्चात शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों को सौंपा जाएगा और मामले की गहनता से जांच की जाएगी।" - देवेंद्र सिंह, थाना प्रभारी, ऐलनाबाद
स्थानीय जनजीवन और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर
एक ही परिवार के तीन सदस्यों की इस तरह से हुई असमय मौत ने पूरे सिरसा और जीटी रोड बेल्ट के सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। ऐलनाबाद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इस घटना के बाद से गहरा सन्नाटा और मायूसी छाई हुई है। स्थानीय व्यापारी वर्ग और आम नागरिक इस बात से पूरी तरह स्तब्ध हैं कि कैसे एक हंसता-खेलता परिवार कुछ ही पलों में इस अकल्पनीय त्रासदी का शिकार हो गया। अंतिम संस्कार के दौरान उमड़ी भारी भीड़ इस बात की गवाही दे रही थी कि इस हादसे ने हर किसी के दिल को किस कदर झकझोर दिया है।
समाज के बुद्धिजीवियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं मानसिक तनाव, पारिवारिक जीवन की जटिलताओं या अचानक उपजे संकटों की ओर इशारा करती हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर न केवल त्वरित राहत और बचाव कार्य महत्वपूर्ण हैं, बल्कि जनमानस में मानसिक स्वास्थ्य और आपसी संवाद के प्रति जागरूकता बढ़ाने की भी आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।





