हरियाणा की धरती अपनी कृषि और उन्नत पशुधन के लिए विश्व विख्यात है, लेकिन इन दिनों प्रदेश के एक पशु मेले में एक ऐसे मेहमान ने दस्तक दी है जिसकी चर्चा गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हो रही है। यह कोई राजनेता या सेलिब्रिटी नहीं, बल्कि मुर्राह नस्ल का एक विशालकाय झोटा है, जिसका नाम 'विधायक' रखा गया है। अपनी कद-काठी और रौबदार लुक के कारण 'विधायक' ने मेले में आने वाले हर शख्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है और इसकी सुरक्षा व देखभाल किसी वीआईपी से कम नहीं है।
मुर्राह नस्ल, जिसे हरियाणा में 'काला सोना' (Black Gold) कहा जाता है, उसके इस बेहतरीन नमूने की कीमत ने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। मेले में पहुंचे शौकीनों और बड़े पशुपालकों ने इसकी बोली 15 करोड़ रुपये तक लगा दी है। हालांकि, 'विधायक' की यह कीमत केवल उसकी शारीरिक बनावट के कारण नहीं है, बल्कि इसके पीछे उसका शानदार ट्रैक रिकॉर्ड भी है। यह झोटा अब तक देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित 23 बड़ी प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुका है, जो इसकी श्रेष्ठता को प्रमाणित करता है।
शाही जीवनशैली और खान-पान का अनोखा संगम
'विधायक' का रुतबा केवल उसकी कीमत तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी जीवनशैली भी किसी राजा-महाराजा जैसी है। इसके मालिक ने इसकी सेहत और चमक को बनाए रखने के लिए एक विशेष टीम और डाइट चार्ट तैयार किया है। इसकी दैनिक खुराक में साधारण चारा नहीं, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले सूखे मेवे और डेयरी उत्पाद शामिल हैं।
| विशेषता / विवरण | विवरण (Details) |
|---|---|
| नाम | विधायक (मुर्राह झोटा) |
| नस्ल | मुर्राह (काला सोना) |
| अनुमानित कीमत | 15 करोड़ रुपये |
| कुल चैंपियनशिप जीत | 23 बार (राष्ट्रीय स्तर) |
| मुख्य आहार | दूध, देसी घी, काजू, बादाम, अखरोट |
| प्रशिक्षण व देखभाल | रोजाना मालिश और 5 किमी की सैर |
'विधायक' के मालिक के अनुसार, इसकी डाइट में रोजाना कई लीटर शुद्ध दूध शामिल है। इसके अलावा, उसे शक्ति और स्फूर्ति के लिए बादाम, काजू और अखरोट का मिश्रण दिया जाता है। पाचन को सही रखने के लिए उत्तम श्रेणी का हरा चारा और चोकर भी आहार का हिस्सा है। केवल भोजन ही नहीं, बल्कि उसकी त्वचा की चमक बरकरार रखने के लिए रोजाना घंटों सरसों के तेल से मालिश की जाती है और उसे नियमित रूप से टहलाया जाता है ताकि उसकी मांसपेशियां मजबूत बनी रहें।
नस्ल संरक्षण और मालिक का अटूट लगाव
पशु मेले में 15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कीमत लगने के बावजूद 'विधायक' के मालिक इसे बेचने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि यह पशु उनके परिवार का एक अभिन्न हिस्सा है और उनकी शान का प्रतीक है। मालिक के अनुसार, उनका मुख्य उद्देश्य केवल व्यापार करना नहीं है, बल्कि हरियाणा की विश्व प्रसिद्ध मुर्राह नस्ल का संरक्षण और उसमें सुधार करना है।
"विधायक केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी मेहनत और हरियाणा के पशुपालन गौरव का प्रतीक है। 15 करोड़ क्या, हमें इससे भी बड़ा ऑफर मिले तो भी हम इसे नहीं बेचेंगे। हम चाहते हैं कि इस नस्ल के जरिए प्रदेश के अन्य पशुपालक भी प्रेरित हों और अपनी नस्लों में सुधार करें।"
स्थानीय पशुपालन अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
हरियाणा की जीटी रोड बेल्ट, विशेषकर पानीपत, करनाल और कुरुक्षेत्र में मुर्राह नस्ल के पशुओं का पालन एक बड़े उद्योग के रूप में उभरा है। 'विधायक' जैसे पशुओं की प्रदर्शनी से न केवल स्थानीय किसानों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि नस्ल सुधार (Breed Improvement) की दिशा में भी जागरूकता आती है। मेले में आए अन्य पशुपालक भी 'विधायक' के मालिक से उसकी डाइट और ब्रीडिंग के तरीकों के बारे में जानकारी ले रहे हैं, ताकि वे भी अपने पशुधन की गुणवत्ता बढ़ा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उच्च गुणवत्ता वाले पशुओं से होने वाला सीमन व्यापार भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। 'विधायक' की लोकप्रियता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक पालन के मेल से हरियाणा का पशुधन आज भी पूरे देश में नंबर वन है। आगामी दिनों में इस झोटे को अन्य बड़े राष्ट्रीय मेलों में भी ले जाने की योजना है, जहाँ इसके एक बार फिर चैंपियन बनने की उम्मीद जताई जा रही है।





