हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले में तावडू उपमंडल के गांव सुनारी की बेटी दिलशाना ने अपनी प्रतिभा और कठिन परिश्रम के दम पर बड़ी सफलता हासिल की है। हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) द्वारा घोषित अतिरिक्त जिला न्यायवादी (ADA) भर्ती परीक्षा के अंतिम परिणाम में दिलशाना का चयन हुआ है। इस उपलब्धि के बाद न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे मेवात क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। न्यायिक एवं अभियोजन क्षेत्र में क्षेत्र की युवतियों का बढ़ता दखल महिला सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आया है।
दिलशाना के परिवार के लिए यह दूसरी बड़ी कामयाबी है। करीब दो वर्ष पूर्व अक्टूबर 2024 में उनकी बड़ी बहन रुखसाना ने हरियाणा न्यायिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर सिविल जज के रूप में पदभार संभाला था, जो वर्तमान में गुरुग्राम में न्यायिक दंडाधिकारी के पद पर सेवाएं दे रही हैं। अब छोटी बहन के अभियोजन विभाग में गजेटेड क्लास-2 अधिकारी के रूप में चयन होने से सुनारी गांव का यह परिवार इलाके में मिसाल बन चुका है।
शिक्षा का सफर और प्रतियोगी परीक्षाओं में सतत संघर्ष
दिलशाना के पिता मोहम्मद इलियास ग्रामीण बैंक के सेवानिवृत्त शाखा प्रबंधक हैं। दिलशाना ने अपनी स्कूली शिक्षा तावडू स्थित मेवात मॉडल स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) की पांच वर्षीय विधि संकाय प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर कानून की पढ़ाई शुरू की और वर्ष 2022 में एलएलबी की उपाधि प्राप्त की। उच्च विधि शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया में प्रवेश लिया और क्रिमिनोलॉजी (अपराध शास्त्र) शाखा में एलएलएम की डिग्री पूरी की।
वर्ष 2024 से उन्होंने घर पर रहकर अभियोजन और न्यायिक सेवा परीक्षाओं की औपचारिक तैयारी शुरू की। आयोग द्वारा विज्ञापित अतिरिक्त जिला न्यायवादी पद के लिए अगस्त 2026 में आयोजित लिखित परीक्षा और 11 अक्टूबर को संपन्न साक्षात्कार के उपरांत आयोग की चयन सूची में अपना स्थान पक्का किया। इससे पूर्व उनका चयन हिमाचल प्रदेश न्यायिक सेवा की प्रतीक्षा सूची में भी दर्ज हो चुका था।
| चयनित अभ्यर्थी | पद नाम | मूल निवास | शैक्षणिक योग्यता | पारिवारिक पृष्ठभूमि |
|---|---|---|---|---|
| दिलशाना | अतिरिक्त जिला न्यायवादी (ADA) | गांव सुनारी, तावडू (नूंह) | BA-LLB (AMU), LLM (जामिया) | पिता: मो. इलियास (पूर्व बैंक प्रबंधक) |
| रुखसाना (बड़ी बहन) | सिविल जज / ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट | गांव सुनारी, तावडू (नूंह) | विधि स्नातक (AMU) | वर्तमान पोस्टिंग: गुरुग्राम जिला न्यायालय |
परिवार का समर्थन और सफलता का संदेश
अपनी कामयाबी का श्रेय परिजनों के विश्वास और मार्गदर्शन को देते हुए दिलशाना ने स्पष्ट किया कि जब उनकी बड़ी बहन रुखसाना ने विधि की पढ़ाई शुरू की, तभी उनके मन में भी न्याय व्यवस्था का हिस्सा बनने की इच्छा जागी। उन्होंने बताया कि निरंतर अभ्यास और विषय की गहरी समझ से किसी भी प्रतिस्पर्धी परीक्षा को निकाला जा सकता है।
"मेरी सफलता में परिवार का अटूट सहयोग रहा है, विशेषकर पिता ने हर परिस्थिति में मनोबल बढ़ाया। मेवात में बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देना समाज के उत्थान के लिए सबसे जरूरी है। जब एक बेटी शिक्षित और सक्षम बनती है तो पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।" - दिलशाना, नवनियुक्त अतिरिक्त जिला न्यायवादी
वहीं उनके पिता मोहम्मद इलियास ने कहा कि उन्होंने कभी भी बेटियों की पढ़ाई में संसाधनों की कमी नहीं आने दी। उन्होंने दसवीं कक्षा के बाद से ही बेटियों को उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुकूल वातावरण प्रदान किया। क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस उपलब्धि को मेवात के शैक्षणिक इतिहास में मील का पत्थर करार दिया है।
मेवात के शैक्षणिक परिदृश्य और जनजीवन पर प्रभाव
ऐतिहासिक रूप से शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े माने जाने वाले नूंह-मेवात क्षेत्र में एक ही घर से दो बेटियों का राज्य की शीर्ष विधिक और न्यायिक सेवाओं में चयनित होना अत्यंत प्रेरक है। इस सफलता से ग्रामीण अंचल में अपनी बेटियों को उच्च व व्यावसायिक शिक्षा दिलाने के प्रति अभिभावकों की सोच में बड़ा बदलाव आएगा। विशेष रूप से विधिक सेवा और प्रशासनिक पदों की तैयारी कर रही स्थानीय छात्राओं के आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।



