हरियाणा के मौसम चक्र में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते एकाएक बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। शनिवार तड़के से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में बादलों के डेरे के बीच ठंडी हवाओं का दौर शुरू हो गया। इसी क्रम में झज्जर जिले के ग्रामीण अंचल में तेज गर्जना के साथ हुई ओलावृष्टि ने समूचे इलाके को सफेद चादर से ढक दिया, जिससे तापमान में भारी गिरावट महसूस की जा रही है। अचानक बढ़ी इस ठंडक ने जहां आमजन को फिर से गर्म कपड़े निकालने पर विवश कर दिया है, वहीं खेतों में तैयार खड़ी रबी की फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
इधर, मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ ने मौसमी परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के 9 प्रमुख जिलों के लिए आधिकारिक तौर पर येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से धूल भरी हवाएं चल सकती हैं और गरज-चमक के साथ कई स्थानों पर मध्यम से तेज बारिश दर्ज होने के प्रबल आसार बने हुए हैं। प्रशासन ने किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों को प्रतिकूल मौसम के दौरान एहतियात बरतने की सलाह दी है।
झज्जर के गांवों में सफेद चादर बिछी, पारे में भारी गिरावट
शनिवार सुबह झज्जर जिले के दक्षिणी-पश्चिमी देहाती क्षेत्र में अचानक घने काले बादल छा गए। इसके तुरंत बाद बिरोहड़, मालियावास, कालियावास और आसपास की ढाणियों में तेज गरज के साथ तेज बौछारें शुरू हुईं और देखते ही देखते चने के आकार के ओले गिरने लगे। ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 10 से 15 मिनट तक लगातार हुई ओलावृष्टि के कारण गलियों, छतों और खेतों में बर्फ के ढेरों जैसी स्थिति बन गई। अचानक हुए इस मौसमी प्रहार से वातावरण में ठिठुरन लौट आई है।
ओलावृष्टि के इस दौर ने विशेष रूप से अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। खेतों में इस समय सरसों की फसल कटाई की ओर अग्रसर है या पक चुकी है, जबकि गेहूं की फसल में बालियां आ रही हैं। किसानों का कहना है कि तेज हवा और ओलों की मार से सरसों की फलियां झड़ने और गेहूं के पौधों के जमीन पर बिछ जाने (लॉजिंग) का भारी अंदेशा पैदा हो गया है, जिससे पैदावार पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
| प्रशासनिक जिला | मौसम विभाग का अलर्ट | हवा की संभावित गति | संभावित मौसमी प्रभाव |
|---|---|---|---|
| झज्जर | ओलावृष्टि दर्ज / सामान्य निगरानी | 25-35 किमी/घंटा | तापमान में गिरावट, फसलों पर ओलों का असर |
| करनाल व पानीपत | येलो अलर्ट (Yellow Alert) | 30-40 किमी/घंटा | गरज-चमक, आंधी और मध्यम वर्षा |
| कुरुक्षेत्र व कैथल | येलो अलर्ट (Yellow Alert) | 30-40 किमी/घंटा | तेज हवाएं, आकाशीय बिजली और बूंदाबांदी |
| हिसार, सिरसा व फतेहाबाद | येलो अलर्ट (Yellow Alert) | 35-40 किमी/घंटा | धूल भरी आंधी, आंशिक बारिश की संभावना |
| जींद व सोनीपत | येलो अलर्ट (Yellow Alert) | 30-40 किमी/घंटा | बादलवाई, तेज झोंके और हल्की से मध्यम बारिश |
मौसम विभाग का पूर्वानुमान और अलर्ट वाले 9 जिले
मौसम विभाग चंडीगढ़ द्वारा जारी विशेष बुलेटिन के अनुसार, वायुमंडल में बने ट्रफ और उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर हरियाणा के मैदानी इलाकों पर दिखाई दे रहा है। शनिवार को विशेष तौर पर सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, जींद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत और सोनीपत जिलों के लिए येलो अलर्ट प्रभावी किया गया है। इन जिलों में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और दोपहर बाद अथवा शाम के वक्त मौसम और अधिक उग्र हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं कमजोर ढांचों, टीन शेड और बिजली के खंभों व तारों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अतिरिक्त गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने (लाइटनिंग) का भी खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए लोगों को खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लेने तथा सुरक्षित पक्के भवनों में रहने की हिदायत दी गई है।
किसानों और मंडियों के लिए बढ़ेगा प्रबंधन का दायित्व
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश की तीव्रता हल्की रहती है तो यह गेहूं के लिए आंशिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन यदि बारिश के साथ तेज अंधड़ और ओले गिरे तो यह तैयार फसलों के लिए तबाही साबित होगा। विशेष रूप से जीटी रोड बेल्ट के करनाल, पानीपत और कुरुक्षेत्र जैसे प्रमुख कृषि प्रधान जिलों में किसान अपनी उपज को लेकर संशय में हैं। सरसों के दाने बिखरने से किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कृषि विभाग ने किसानों को परामर्श जारी किया है कि वे इस मौसम में फसलों में रासायनिक छिड़काव और सिंचाई का कार्य तुरंत रोक दें। साथ ही जिन किसानों ने सरसों की कटाई कर ली है, वे अपनी कटी हुई फसल को तिरपाल या सुरक्षित शेड में ढककर रखें ताकि भीगने से फसल की गुणवत्ता खराब न हो। संबंधित जिला प्रशासन को भी जलभराव और बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर रखा गया है।





