हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को लेकर सरकार और प्रशासन के दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पिनगवां कस्बे के तीन सरकारी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं भी नदारद हैं। यहाँ सैकड़ों की संख्या में नौनिहाल कड़कड़ाती ठंड और गर्मी के मौसम में भी जमीन पर बिछी टाट-पट्टियों पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि कस्बे के चार प्रमुख स्कूलों में से केवल एक स्कूल को ही ड्यूल डेस्क नसीब हुए हैं, जबकि बाकी तीन स्कूलों के विद्यार्थी आज भी विभाग की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पिनगवां में शिक्षा व्यवस्था का हाल यह है कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की बातें केवल कागजों तक सीमित नजर आती हैं। स्कूलों में बेंच न होने के कारण न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि घंटों जमीन पर बैठने के कारण उन्हें शारीरिक दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि उनके बच्चों को आधुनिक शिक्षा के दौर में भी आदिम युग की तरह जमीन पर बिठाया जा रहा है।
पिनगवां के स्कूलों में बुनियादी ढांचे की वर्तमान स्थिति
पिनगवां कस्बे में मुख्य रूप से चार सरकारी स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इनमें प्राइमरी बॉयज स्कूल, गर्ल्स प्राइमरी स्कूल, गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल और बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। वर्तमान में केवल बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ही विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच उपलब्ध कराए गए हैं। शेष तीन संस्थानों में स्थिति बेहद दयनीय है।
| स्कूल का नाम | विद्यार्थियों की संख्या | डेस्क की स्थिति |
|---|---|---|
| प्राइमरी बॉयज स्कूल, पिनगवां | 289 | शून्य (जमीन पर बैठते हैं बच्चे) |
| गर्ल्स प्राइमरी स्कूल, पिनगवां | लगभग 400 | शून्य (टाट-पट्टी का सहारा) |
| गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल | सैकड़ों छात्राएं | अत्यधिक कमी |
| बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल | पर्याप्त | सुविधा उपलब्ध |
प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की संख्या काफी अधिक है। गर्ल्स प्राइमरी स्कूल में 400 के करीब छात्राएं और बॉयज प्राइमरी स्कूल में 289 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद विभाग द्वारा डेस्क उपलब्ध न कराना प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है। विद्यार्थियों का कहना है कि बेंच न होने से उनके कपड़े गंदे हो जाते हैं और लंबे समय तक झुककर लिखने से पीठ और गर्दन में दर्द की शिकायत भी रहती है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और विभागीय आश्वासन
इस पूरे मामले पर स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग को लिखित में मांग पत्र भेजा है, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अध्यापक हरीश चंद्र ने बताया कि विभाग को बार-बार याद दिलाने के बावजूद अभी तक डेस्क की आपूर्ति नहीं की गई है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) राजेंद्र शर्मा ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
"शिक्षा विभाग स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है। आला अधिकारियों के निर्देशानुसार प्रभावित स्कूलों की सूची तैयार कर ली गई है। जल्द ही पिनगवां के इन तीनों स्कूलों में पर्याप्त मात्रा में ड्यूल डेस्क उपलब्ध करा दिए जाएंगे ताकि बच्चों को जमीन पर न बैठना पड़े। जिला उपायुक्त भी इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।" - राजेंद्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, नूंह।
स्थानीय जनजीवन और बच्चों पर पड़ता नकारात्मक प्रभाव
नूंह जिला पहले से ही नीति आयोग की आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल है, जहाँ शिक्षा और स्वास्थ्य के मानकों को सुधारने के लिए विशेष बजट का प्रावधान होता है। इसके बावजूद पिनगवां जैसे बड़े कस्बे के स्कूलों में बेंच न होना व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। अनस खान, कासिम और नाजिम जैसे छात्रों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे भी अन्य निजी स्कूलों की तरह बेंच पर बैठकर पढ़ना चाहते हैं, ताकि वे अपनी पढ़ाई पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों के मानसिक विकास और स्कूल आने की रुचि को कम करता है। यदि सरकारी स्कूलों में इसी तरह की अव्यवस्था बनी रही, तो ड्रॉपआउट रेट बढ़ने का खतरा भी बना रहता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग अपने वादे के मुताबिक कितनी जल्दी इन नौनिहालों को डेस्क उपलब्ध करा पाता है।


