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नूंह की शिक्षा व्यवस्था बेहाल: पांचों खंडों में BEO पद रिक्त, प्रिंसिपलों के भरोसे सरकारी स्कूल

हरियाणा के नूंह जिले में पांचों खंडों में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पद खाली पड़े हैं, जिससे सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था प्राचार्यों के अतिरिक्त प्रभार पर चल।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
24 अक्टूबर 2026 को 04:50 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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नूंह की शिक्षा व्यवस्था बेहाल: पांचों खंडों में BEO पद रिक्त, प्रिंसिपलों के भरोसे सरकारी स्कूल
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खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •हरियाणा के नूंह जिले के सभी पांचों खंडों में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पद लंबे समय से रिक्त हैं।
  • •नूंह, तावडू, पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका और नगीना खंड में स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हुई है।
  • •सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था का संचालन प्राचार्यों को अतिरिक्त खंड शिक्षा अधिकारी का प्रभार देकर किया जा रहा है, जिससे उन पर दोहरी जिम्मेदारी का बोझ बढ़ गया है।
  • •जिले में उप-जिला शिक्षा अधिकारी (DDEO) के दो महत्वपूर्ण पद भी खाली पड़े हैं, जो शिक्षा विभाग के कामकाज को प्रभावित कर रहे हैं।
  • •जिला शिक्षा अधिकारी ने उच्च अधिकारियों को रिक्त पदों की जानकारी दी है, लेकिन स्थायी नियुक्तियों का इंतजार जारी है।

हरियाणा के मेवात क्षेत्र स्थित नूंह जिले में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था एक गंभीर प्रशासनिक संकट का सामना कर रही है। जिले के सभी पांचों खंडों – नूंह, तावडू, पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका और नगीना – में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक कमी के चलते, शिक्षा विभाग का कामकाज अस्थायी व्यवस्था के सहारे चल रहा है, जिसका सीधा असर जिले के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में, जिले के सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों को खंड शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जिससे उन पर अपने विद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ खंड स्तर के व्यापक कार्यभार का भी दबाव आ गया है। इसके अतिरिक्त, जिले में उप-जिला शिक्षा अधिकारी (DDEO) के दो महत्वपूर्ण पद भी रिक्त हैं, जो शिक्षा प्रणाली की निगरानी और प्रबंधन को और अधिक कमजोर कर रहे हैं। इस गंभीर रिक्तता ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और प्रभावी योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

जिम्मेदारियों का दोहरा बोझ और प्रभावित निगरानी

खंड शिक्षा अधिकारी का पद सरकारी स्कूलों के सुचारू संचालन और प्रभावी निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। बीईओ शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, शैक्षणिक गतिविधियों की नियमित समीक्षा करने, विभागीय नीतियों और योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने तथा स्कूलों से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान करने जैसी व्यापक जिम्मेदारियां निभाते हैं। एक स्थायी अधिकारी की अनुपस्थिति में इन सभी कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

वर्तमान में, अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे प्राचार्यों को अपने विद्यालय की दिन-प्रतिदिन की प्रशासनिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ पूरे खंड के स्कूलों की निगरानी और प्रबंधन का काम भी देखना पड़ रहा है। यह दोहरी जिम्मेदारी उनके कार्यभार को अत्यधिक बढ़ा देती है, जिससे वे न तो अपने विद्यालय पर पूरा ध्यान दे पाते हैं और न ही खंड स्तर के दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर पाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि शिक्षकों की जवाबदेही, विद्यार्थियों की पढ़ाई का स्तर और सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कहीं न कहीं प्रभावित होता है।

पद का नामरिक्त पदों की संख्याप्रभावित खंड/क्षेत्र
खंड शिक्षा अधिकारी (BEO)5नूंह, तावडू, पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका, नगीना
उप-जिला शिक्षा अधिकारी (DDEO)2संपूर्ण नूंह जिला

अधिकारियों की प्रतिक्रिया और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई

जिले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस स्थिति को स्वीकार किया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) राजेंद्र शर्मा ने बताया कि जिले के पांचों खंडों में शिक्षण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्राचार्यों को अस्थायी तौर पर खंड शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है और स्थायी नियुक्तियों के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं जारी हैं।

यह स्थिति दर्शाती है कि राज्य स्तर पर इन रिक्त पदों को भरने की आवश्यकता को महसूस किया गया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। इन रिक्तियों के कारण न केवल प्रशासनिक ढांचा कमजोर हुआ है, बल्कि शिक्षा विभाग के भीतर भी कर्मचारियों और अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ गया है। नियमित अधिकारियों की तैनाती से ही स्कूलों का लगातार निरीक्षण, शिक्षकों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने कहा, "जिले के पांचों खंडों में शिक्षण व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्राचार्यों को अस्थायी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वर्तमान में शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्राचार्यों को ही खंड शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार देकर व्यवस्था संभाली जा रही है। रिक्त पदों की जानकारी पहले भी कई बार उच्च अधिकारियों को दी गई है और स्थायी नियुक्तियों के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।"

स्थानीय जनजीवन और शिक्षा की गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव

नूंह जिले की शिक्षा व्यवस्था में यह प्रशासनिक कमी सीधे तौर पर स्थानीय जनजीवन और विशेषकर विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करती है। खंड शिक्षा अधिकारियों की अनुपस्थिति में स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन जाती है। शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, पाठ्यक्रम का समय पर पूरा होना, मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता और सरकारी योजनाओं जैसे मिड-डे मील या छात्रवृत्ति कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सीधे तौर पर बीईओ की सक्रिय भूमिका पर निर्भर करता है।

जब ये पद रिक्त होते हैं, तो इन सभी पहलुओं पर ढिलाई आने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को सबसे अधिक नुकसान होता है। अभिभावकों में भी सरकारी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। दीर्घकालिक रूप से, यह स्थिति जिले के मानव संसाधन विकास को बाधित कर सकती है और सामाजिक-आर्थिक प्रगति में बाधा डाल सकती है।

स्थायी नियुक्तियों की आवश्यकता और आगामी कदम

नूंह जिले में खंड शिक्षा अधिकारी और उप-जिला शिक्षा अधिकारी के रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्तियां अत्यंत आवश्यक हैं। यह केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जिले की शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार और संबंधित शिक्षा विभाग को इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखना चाहिए।

तत्काल प्रभाव से इन पदों पर योग्य और अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति से न केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा, बल्कि प्राचार्यों पर से अनावश्यक बोझ भी कम होगा, जिससे वे अपने मूल दायित्वों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। स्थायी नियुक्तियों से विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा और स्कूलों से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान करने में भी आसानी होगी, जिससे नूंह जैसे पिछड़े जिले में शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने में मदद मिलेगी।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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