हरियाणा में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण का जिम्मा एक निजी कंपनी को सौंपने के सरकार के फैसले के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार से शुरू हुई यह अनिश्चितकालीन हड़ताल अब प्रदेश के 15 जिलों में फैल चुकी है, जिससे लाखों उपभोक्ताओं को अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे गंभीर स्थिति हिसार, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र और फरीदाबाद में देखी जा रही है, जहां पिछले 20 से 24 घंटों से बिजली की आपूर्ति पूरी तरह बाधित है।
इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए आज पंचकूला के पीडब्ल्यूडी (PWD) रेस्ट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। प्रदेश के बिजली मंत्री अनिल विज स्वयं इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों के बीच आमने-सामने की बातचीत होगी। कर्मचारी संगठन अपनी एक सूत्रीय मांग पर अड़े हैं कि जब तक निजी कंपनी का लाइसेंस रद्द नहीं किया जाता, तब तक हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी।
प्रदेश भर में प्रदर्शन और ब्लैकआउट की स्थिति
हड़ताल का व्यापक असर अब धरातल पर दिखने लगा है। हिसार के कई पॉश इलाकों में पिछले 24 घंटों से बिजली न होने के कारण लोगों का धैर्य जवाब दे गया, जिसके बाद नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर जाम लगा दिया। वहीं कुरुक्षेत्र और कैथल में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। बिजली संकट के कारण न केवल घरेलू उपभोक्ता परेशान हैं, बल्कि औद्योगिक इकाइयों और कृषि क्षेत्र पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। कुरुक्षेत्र और कैथल बार एसोसिएशन ने भी कर्मचारियों के समर्थन में वर्क सस्पेंड करने का ऐलान किया है, जिससे न्यायिक कार्य भी प्रभावित हुए हैं।
| प्रभावित जिला/क्षेत्र | वर्तमान स्थिति | मुख्य समस्या |
|---|---|---|
| हिसार | 24 घंटे से बिजली गुल | पॉश इलाकों में भारी आक्रोश, सड़क जाम |
| गुरुग्राम व नूंह | आंशिक ब्लैकआउट | निजीकरण का केंद्र, कर्मचारियों का कड़ा विरोध |
| पानीपत | थर्मल यूनिट बंद | 2 उत्पादन इकाइयां ठप, ग्रिड पर लोड बढ़ा |
| कुरुक्षेत्र/कैथल | आपूर्ति बाधित | बार एसोसिएशन द्वारा कार्य का बहिष्कार |
| हांसी | 20 घंटे से कट | ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में हाहाकार |
पानीपत थर्मल प्लांट में उत्पादन ठप और तकनीकी संकट
हड़ताल का सबसे तकनीकी और गंभीर प्रभाव पानीपत थर्मल पावर प्लांट पर पड़ा है। जानकारी के अनुसार, थर्मल प्लांट की दो महत्वपूर्ण इकाइयों (Units) को बंद कर दिया गया है। कर्मचारियों के काम पर न होने के कारण मेंटेनेंस और ऑपरेशनल चुनौतियां बढ़ गई हैं, जिससे राज्य के अपने बिजली उत्पादन में भारी गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह हड़ताल एक-दो दिन और खिंची, तो राज्य को बाहरी स्रोतों से महंगी बिजली खरीदने पर मजबूर होना पड़ेगा या फिर लंबे पावर कट लगाने होंगे।
"हमारा विरोध केवल निजीकरण के खिलाफ है। गुरुग्राम और नूंह जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बिजली का लाइसेंस निजी हाथों में देना सरकारी तंत्र को कमजोर करना है। जब तक सरकार इस लाइसेंस को रद्द करने का लिखित आश्वासन नहीं देती, हमारी स्ट्राइक और तेज होगी।" - बलजीत बेनीवाल, उपप्रधान, बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा
प्रशासनिक सतर्कता और आगामी रणनीति
सरकार ने स्थिति को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि कानून-व्यवस्था न बिगड़े। बिजली मंत्री अनिल विज ने संकेत दिए हैं कि वे कर्मचारियों की मांगों को सुनने के लिए तैयार हैं, लेकिन जनता को हो रही असुविधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में सरकार बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करेगी ताकि निजीकरण के मुद्दे पर भी स्पष्टता आए और बिजली आपूर्ति भी तुरंत बहाल हो सके।
स्थानीय जनजीवन पर प्रभाव और नागरिकों की परेशानी
बिजली न होने का सीधा असर पानी की आपूर्ति पर भी पड़ा है। कई शहरों में सुबह पीने के पानी की सप्लाई नहीं हो पाई, जिससे घरेलू कामकाज ठप हो गए। छोटे उद्योगों और वर्कशॉप में काम करने वाले मजदूरों की दिहाड़ी मारी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि इन्वर्टर और जनरेटर भी अब जवाब देने लगे हैं। यदि आज की बैठक बेनतीजा रहती है, तो प्रदेश में ऊर्जा संकट एक बड़े प्रशासनिक संकट का रूप ले सकता है।





