हरियाणा के रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर से गंभीर बहस के केंद्र में आ गई है। शहर के पॉश माने जाने वाले सेक्टर-4 में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार की जा रही सीमेंटेड (सीसी) सड़क के निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। स्थिति यह है कि अभी सड़क पूरी तरह से बनकर तैयार भी नहीं हुई है और आगे के हिस्से में निर्माण आगे बढ़ने के साथ ही पीछे के हिस्सों से रोडियां और कंक्रीट उखड़ने लगी है। इस गंभीर लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में गहरा असंतोष व्याप्त है, जिसके बाद अब प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। विधायक ने नगर परिषद के अधिकारियों की लचर कार्यशैली और उदासीन रवैये पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने खुले तौर पर यह तक कह दिया है कि आखिरकार लापरवाह अधिकारियों के सिर पर किसका वरदहस्त है, जो बार-बार की शिकायतों और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जमीनी हकीकत सुधारने को तैयार नहीं हैं। विधायक ने इस पूरे प्रकरण को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि जनता के खून-पसीने की कमाई और सार्वजनिक धन का इस तरह से दुरुपयोग किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
पुरानी विफलताओं के बाद नए निर्माण में भी घोर लापरवाही
इस सड़क निर्माण से जुड़ा इतिहास भी प्रशासनिक दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सेक्टर-4 की पूर्व में बनी पुरानी सड़क थोड़े ही समय में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी थी कि उसे दुरुस्त करने के लिए तीन बार अलग-अलग मौकों पर मरम्मत कार्य कराया गया, लेकिन हर बार कुछ समय बाद ही सड़क की ऊपरी परत उधड़ जाती थी। बार-बार की प्रशासनिक विफलता और जनता की लगातार मिल रही शिकायतों के चलते ही इस सड़क को सिरे से दोबारा बनाने का निर्णय लिया गया था, ताकि नागरिकों को आवागमन में स्थायी राहत मिल सके।
हालांकि, अब जब करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करके नई सीसी सड़क बिछाई जा रही है, तो निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी मानकों और लेवलिंग को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। लोगों का आरोप है कि सड़क की ढलान और समतलता (लेवलिंग) का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया है, जिसके कारण कहीं सड़क बहुत ऊंची तो कहीं नीची हो गई है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जहां हाल ही में कंक्रीट डाली गई है, वहां से कुछ ही हफ्तों के भीतर छोटे-छोटे पत्थर और रोडियां बाहर आने लगी हैं। विधायक आवास के अत्यंत समीप स्थित होने के बावजूद इस स्तर की घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल होना प्रशासनिक निगरानी तंत्र की पोल खोलता है।
| निर्माण स्थल / क्षेत्र | अनुमानित लागत | सामने आई मुख्य शिकायत | प्रशासनिक कदम |
|---|---|---|---|
| सेक्टर-4, रेवाड़ी | लगभग 1.5 करोड़ रुपये | एक माह के भीतर सीसी रोड से रोडियां उखड़ना और लेवलिंग में खामी | विधायक द्वारा डीएमसी को उच्चस्तरीय जांच के निर्देश |
| मोती चौक से विश्वकर्मा चौक | सार्वजनिक नहीं | अनियमितताओं के आरोप और स्थानीय व्यापारियों का विरोध | अधिकारियों द्वारा अनदेखी की शिकायतें |
शहर में आधारभूत ढांचे के निर्माण में भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन सामग्री के इस्तेमाल का यह कोई पहला वाकया नहीं है। इससे पहले मोती चौक से विश्वकर्मा चौक के बीच बनाई जा रही सीसी सड़कों के निर्माण के दौरान भी स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी यह आरोप लगाया गया था कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की जा रही है, लेकिन संबंधित महकमे के अधिकारियों ने मौके पर जाकर जमीनी हकीकत जांचने की कोई जरूरत नहीं समझी। यहां तक कि नगर परिषद चुनावों के दौरान भी शहर की सड़कों से उखड़ती रोडियां और भ्रष्टाचार का मुद्दा राजनीतिक गलियारों में जोर-शोर से गूंजा था।
उस समय स्वयं केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने चुनावी मंचों से सार्वजनिक रूप से इस बात पर गहरी नाराजगी जताई थी कि विकास कार्यों में भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद मैदानी स्तर पर अधिकारियों के रवैये में कोई सकारात्मक बदलाव आता नहीं दिख रहा है। वर्तमान घटना को लेकर जब विधायक ने अधिकारियों से बात की, तो इसे केंद्रीय मंत्री के साथ जोड़कर देखे जाने की बात सामने आई, क्योंकि नगर परिषद की चेयरपर्सन राव समर्थक मानी जाती हैं। इस राजनीतिक रस्साकशी के बीच आम जनता का नुकसान हो रहा है और करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी शहरवासियों को मजबूत सड़कें नसीब नहीं हो रही हैं।
"सेक्टर-4 में बन रही सड़क से निर्माण के एक महीने के भीतर ही रोडियां निकलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन उनकी कार्यशैली में सुधार नहीं आ रहा। मैंने जिला नगर आयुक्त (DMC) को मौके का निरीक्षण कर सभी तकनीकी खामियों को तुरंत दुरुस्त करवाने के निर्देश दिए हैं।" - लक्ष्मण सिंह यादव, विधायक, रेवाड़ी
जनजीवन पर सीधा असर और जवाबदेही तय करने की मांग
सड़क निर्माण में इस तरह की धांधली का सीधा खामियाजा आम नागरिकों और वाहन चालकों को भुगतना पड़ता है। सेक्टर-4 के निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से एक दुरुस्त सड़क की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन जिस तरह से निर्माण कार्य के दौरान ही रोडियां उखड़ रही हैं, उससे साफ जाहिर है कि यह सड़क कुछ महीनों से ज्यादा टिकने वाली नहीं है। इससे एक तरफ जहां सरकारी खजाने की बर्बादी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ धूल उड़ने और गड्डों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी रहती है। व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद अब जिला प्रशासन और स्थानीय निकाय विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब जनता के चुने हुए प्रतिनिधि के घर के पास इस तरह का घटिया काम हो सकता है, तो शहर के बाकी हिस्सों में ठेकेदारों ने किस स्तर का निर्माण किया होगा। यह घटना इस बात की तस्दीक करती है कि फील्ड में तैनात इंजीनियरों और निगरानी समितियों की मिलीभगत के बिना इस तरह की मनमानी संभव नहीं है। यदि समय रहते इस पर नकेल नहीं कसी गई, तो सरकार की विकासोन्मुख छवि को भारी धक्का पहुंच सकता है।
अब इस पूरे मामले की कमान जिला नगर आयुक्त (DMC) के हाथ में सौंप दी गई है। विधायक के कड़े निर्देशों के बाद अब डीएमसी स्तर पर इस सड़क के निर्माण में प्रयुक्त सामग्रियों, सीमेंट के अनुपात और तकनीकी मापदंडों की विस्तृत जांच की जाएगी। यदि जांच रिपोर्ट में ठेकेदार और संबंधित कनिष्ठ या सहायक इंजीनियरों की लापरवाही या भ्रष्टाचार साबित होता है, तो न केवल सड़क को दोबारा उखाड़कर नए सिरे से बनवाना होगा, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी अमल में लानी होगी। रेवाड़ी की जनता अब इस बात पर टकटकी लगाए बैठी है कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कितनी सख्ती से पेश आता है।





