हरियाणा के पंचकूला जिले से न्यायपालिका का एक बड़ा और सख्त संदेश सामने आया है। यहाँ की एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मानवता को शर्मसार करने वाले दो अलग-अलग मामलों में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। पहले मामले में, कोर्ट ने एक 10 वर्षीय कैंसर पीड़ित मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनीष दुआ की अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी पर 63 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
कैंसर के इलाज के दौरान मासूम से दरिंदगी का पूरा घटनाक्रम
यह मामला नवंबर 2022 का है, जब पंचकूला के सेक्टर 5 महिला थाना पुलिस ने पीड़िता की मां की शिकायत पर केस दर्ज किया था। दोषी की पहचान बिजेंद्र सिंह के रूप में हुई है, जो सेक्टर 17 स्थित राजीव कॉलोनी का निवासी है। जानकारी के अनुसार, घटना 11 मई 2022 की है जब मासूम बच्ची का चंडीगढ़ पीजीआई में कैंसर का गंभीर इलाज चल रहा था। पीड़िता की मां ने पुलिस को बताया कि बिजेंद्र सिंह उनकी बहन का प्रेमी था और उसने घर में घुसकर बच्ची के साथ कई बार गलत काम किया।
घटना के बाद जून 2022 में बच्ची के व्यवहार में अचानक बदलाव आया। वह गुमसुम रहने लगी और मानसिक रूप से काफी परेशान दिखने लगी। 13 जून को जब बच्ची को गंभीर रक्तस्राव (Bleeding) हुआ, तो उसे पीजीआई और जीएमएसएच सेक्टर 16 में भर्ती कराया गया। वहीं स्वास्थ्य जांच के दौरान मासूम ने अपनी मां को आरोपी की करतूतों के बारे में बताया। आरोपी ने बच्ची और उसकी छोटी बहन को जान से मारने की धमकी भी दी थी ताकि वे किसी को कुछ न बता सकें।
| विवरण | केस 1: कैंसर पीड़िता मामला | केस 2: सगे पिता का मामला |
|---|---|---|
| दोषी का नाम | बिजेंद्र सिंह (राजीव कॉलोनी) | नाम गोपनीय (सगा पिता) |
| सजा की अवधि | 20 साल कठोर कारावास | 20 साल कठोर कारावास |
| आर्थिक जुर्माना | 63,000 रुपये | 26,000 रुपये |
| न्यायाधीश | मनीष दुआ (जिला एवं सत्र न्यायाधीश) | बिक्रमजीत अरोड़ा (अतिरिक्त जिला न्यायाधीश) |
| पीड़िता की स्थिति | 10 वर्षीय कैंसर मरीज | 9वीं कक्षा की छात्रा |
शिकायत वापस लेने के लिए परिवार पर बनाया गया दबाव
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जब पीड़िता के परिवार ने कानूनी कार्रवाई शुरू की, तो दोषी बिजेंद्र और उसकी प्रेमिका (पीड़िता की मौसी) ने परिवार को डराने-धमकने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, जुलाई 2022 में आरोपियों ने उनके घर पहुंचकर मारपीट की और शिकायत वापस न लेने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। हालांकि, पुलिस और अभियोजन पक्ष ने मजबूती से साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने बिजेंद्र को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
"दोषी ने न केवल एक मासूम के साथ दुष्कर्म किया, बल्कि उसकी लाचारी और बीमारी का फायदा उठाया। ऐसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं और इसमें किसी भी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है।" - अभियोजन पक्ष की वकील सुखविंदर कौर
दूसरे मामले में सगे पिता को मिली 20 साल की सजा
इसी के साथ पंचकूला की अदालत ने एक अन्य बेहद संवेदनशील मामले में भी फैसला सुनाया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की कोर्ट ने अपनी ही बेटी के साथ दरिंदगी करने वाले एक पिता को 20 साल की जेल और 26 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी। यह मामला मई 2020 में दर्ज हुआ था जब 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा ने अपने पिता के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी थी।
पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसका पिता करीब एक साल से घर के सदस्यों की गैर-मौजूदगी में उसके साथ मारपीट कर दुष्कर्म करता था। मेडिकल जांच में जब छात्रा के गर्भवती होने की पुष्टि हुई, तब इस घिनौने सच का खुलासा हुआ। कोर्ट ने इस मामले को 'अत्यंत दुर्लभ' श्रेणी में रखते हुए दोषी पिता को समाज और परिवार के लिए खतरा माना और उसे कठोर सजा से दंडित किया।
कानूनी प्रक्रिया और भविष्य की कार्रवाई
इन दोनों फैसलों के बाद समाज में यह संदेश गया है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में कानून पूरी सख्ती से काम कर रहा है। पुलिस प्रशासन अब दोषियों की संपत्तियों और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी गहनता से जांच कर रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जुर्माने की राशि का एक हिस्सा पीड़ितों के पुनर्वास और सहायता के लिए उपयोग किया जा सकता है। इन फैसलों से न्यायपालिका के प्रति आम जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है।





