साइबर सिटी गुरुग्राम में डिजिटल ठगों ने अब समाज के प्रतिष्ठित और जागरूक नागरिकों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताज़ा मामला मशहूर फिल्म मेकर और सोशल एक्टिविस्ट दीपिका नारायण भारद्वाज के परिवार से जुड़ा है। दीपिका के बुजुर्ग पिता, जो हरियाणा सरकार में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हैं, एक बेहद शातिर ऑनलाइन स्कैम का शिकार हो गए। अपराधियों ने उनकी पत्नी की आंखों के इलाज के लिए डॉक्टर की अपॉइंटमेंट बुक करने की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनके बैंक खाते में सेंध लगा दी।
यह घटना केवल एक आर्थिक ठगी नहीं है, बल्कि यह गूगल सर्च इंजन पर मौजूद फर्जी जानकारियों और बैंकिंग सुरक्षा प्रणालियों की खामियों को भी उजागर करती है। पीड़ित सत्य नारायण भारद्वाज अपनी पत्नी के लिए शहर के एक नामी अस्पताल में डॉक्टर का समय लेने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि इंटरनेट पर दिख रहा नंबर किसी जीवन रक्षक का नहीं, बल्कि लुटेरों का है।
जालसाजी का डिजिटल जाल: गूगल से रिमोट एक्सेस तक
घटनाक्रम के अनुसार, 5 अक्टूबर को सत्य नारायण भारद्वाज ने गूगल पर संबंधित अस्पताल का कांटेक्ट नंबर खोजा। सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर दिख रहे एक नंबर पर जैसे ही उन्होंने कॉल किया, दूसरी तरफ से किसी पेशेवर अपराधी ने बात की। ठग ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताया और कहा कि अपॉइंटमेंट के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन इंस्टॉल करना अनिवार्य है। व्हाट्सएप पर भेजे गए एक संदिग्ध लिंक के माध्यम से पीड़ित के फोन में एक 'रिमोट एक्सेस' वायरस डाल दिया गया।
इस ऐप के इंस्टॉल होते ही बुजुर्ग के स्मार्टफोन का पूरा नियंत्रण हैकरों के पास चला गया। स्क्रीन शेयरिंग के जरिए अपराधी उनके बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, पासवर्ड और आने वाले ओटीपी को लाइव देख रहे थे। हालांकि, उस वक्त दीपिका भारद्वाज की सतर्कता के कारण फोन से ऐप्स हटा दिए गए और बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, लेकिन ठगों की योजना कुछ और ही थी।
| मुख्य विवरण | तथ्यात्मक जानकारी |
|---|---|
| पीड़ित व्यक्ति | सत्य नारायण भारद्वाज (रिटायर्ड XEN, हरियाणा सरकार) |
| घटना का स्थान | गुरुग्राम, हरियाणा |
| ठगी का माध्यम | फर्जी अस्पताल वेबसाइट व रिमोट एक्सेस ऐप |
| कुल आर्थिक नुकसान | ₹16,000 |
| ट्रांजेक्शन की तारीख | 13 अक्टूबर 2024 |
| आरोपी खाते की लोकेशन | जयपुर, राजस्थान |
खाता फ्रीज होने के बाद भी कैसे कटे पैसे?
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि दीपिका भारद्वाज ने दावा किया है कि उन्होंने घटना के तुरंत बाद अपने पिता के बैंक खाते फ्रीज करवा दिए थे। कुछ दिनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन 13 अक्टूबर की सुबह अचानक उनके खाते से 16 हजार रुपये निकाल लिए गए। आश्चर्य की बात यह है कि इस ट्रांजेक्शन के लिए न तो कोई ओटीपी आया और न ही बैंक की ओर से कोई सुरक्षा अलर्ट मिला।
जांच में पता चला है कि यह राशि जयपुर के किसी बैंक खाते में ट्रांसफर की गई है। दीपिका ने सवाल उठाया है कि जब अकाउंट एक बार फ्रीज कर दिया गया था, तो बिना किसी नए प्रमाणीकरण के अपराधियों ने पैसे कैसे निकाल लिए? यह बैंकिंग सिस्टम की डिजिटल सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
साइबर पुलिस और बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल
पीड़ित परिवार ने इस मामले की शिकायत 'CyberGov' पोर्टल और संबंधित बैंक में दर्ज कराई है। हालांकि, दीपिका भारद्वाज ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि ऑनलाइन शिकायत का अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी मामला दर्ज कराने की बात कही है। यह स्थिति दर्शाती है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ मौजूदा सिस्टम कितना सुस्त और पेचीदा है, जिससे आम नागरिक खुद को असहाय महसूस करता है।
"मेरे पिता के साथ जो हुआ वह किसी भी बुजुर्ग के साथ हो सकता है। हमने खाते फ्रीज किए, फिर भी पैसे कट गए। न ओटीपी आया, न कोई मैसेज। यह सिस्टम की विफलता है। कृपया अपने माता-पिता के फोन चेक करें और उन्हें किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दें।" - दीपिका नारायण भारद्वाज, फिल्म मेकर
नागरिकों के लिए सुरक्षा परामर्श और बचाव के उपाय
दैनिक रियलिटी अपने पाठकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों से अपील करता है कि वे डिजिटल लेनदेन और इंटरनेट सर्च के दौरान अत्यधिक सावधानी बरतें। साइबर विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कभी भी गूगल पर मिले नंबरों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट (जिसके URL में https:// हो) का ही उपयोग करें। यदि कोई अनजान व्यक्ति फोन पर कोई ऐप डाउनलोड करने को कहे, तो वह 100% ठगी का प्रयास हो सकता है।
AnyDesk, TeamViewer या QuickSupport जैसे ऐप्स का उपयोग केवल भरोसेमंद तकनीकी सहायता के लिए ही करें। यदि आपके साथ ठगी होती है, तो तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें और अपने बैंक को सूचित कर कार्ड व नेट बैंकिंग ब्लॉक करवाएं। इस मामले में गुरुग्राम पुलिस की साइबर सेल अब ट्रांजेक्शन ट्रेल के जरिए जयपुर के उस खाताधारक तक पहुँचने की कोशिश कर रही है, जिसके अकाउंट में पैसे भेजे गए हैं।





