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हरियाणा के सरकारी कॉलेज प्रोफेसरों के पासपोर्ट एनओसी पर सख्ती, डीजीएचई ने तय कीं 5 अनिवार्य शर्तें

हरियाणा के सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों को प्रोफेसरों के पासपोर्ट एनओसी के लिए 5 शर्तों की जांच अनिवार्य की गई है। सतर्कता जांच क्लीयरेंस और शपथ पत्र जरूरी।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
22 अक्टूबर 2026 को 08:08 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा के सरकारी कॉलेज प्रोफेसरों के पासपोर्ट एनओसी पर सख्ती, डीजीएचई ने तय कीं 5 अनिवार्य शर्तें
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों को जारी किए कड़े दिशानिर्देश।
  • •पासपोर्ट एनओसी के लिए 5 प्रमुख बिंदुओं वाली चेकलिस्ट के आधार पर रिकॉर्ड जांचना हुआ अनिवार्य।
  • •प्राचार्यों को प्रमाणित करना होगा कि आवेदक के खिलाफ नियम-7 या विजिलेंस जांच लंबित नहीं है।
  • •विदेश प्रवास के दौरान छुट्टी विस्तार और विदेशी नौकरी न करने का शपथ पत्र देना होगा अनिवार्य।

हरियाणा के उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के पासपोर्ट अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने की कार्यप्रणाली में बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है। पंचकूला स्थित उच्च शिक्षा महानिदेशालय (DGHE) ने सभी राजकीय कॉलेजों के प्राचार्यों को कड़े निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब बिना संपूर्ण सेवा रिकॉर्ड जांचे मुख्यालय को कोई भी पासपोर्ट एनओसी का प्रस्ताव नहीं भेजा जाएगा। निदेशालय के संज्ञान में आया था कि कई महाविद्यालयों के प्राचार्य सेवा पंजिका और विभागीय जांचों का वास्तविक मिलान किए बिना ही औपचारिकता पूरी कर फाइलें भेज रहे थे, जिससे व्यवस्था में गंभीर खामियां उभर रही थीं।

इस प्रशासनिक शिथिलता को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के लिए उच्च शिक्षा महानिदेशक कार्यालय ने पांच बिंदुओं की एक विशेष चेकलिस्ट तैयार कर सभी प्राचार्यों को भेजी है। अब प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों और असिस्टेंट प्रोफेसरों के आवेदनों की फाइल पंचकूला मुख्यालय भेजने से पहले कॉलेज स्तर पर प्राचार्य को स्वयं इस चेकलिस्ट के प्रत्येक बिंदु का विधिवत सत्यापन करना होगा। यदि किसी भी स्तर पर दस्तावेजों या सेवा रिकॉर्ड में त्रुटि पाई गई, तो इसकी सीधी जवाबदेही संबंधित कॉलेज प्राचार्य की तय की जाएगी।

पासपोर्ट एनओसी के नए नियम और पांच प्रमुख शर्तें

उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा तय की गई नई कार्यप्रणाली के तहत प्राचार्यों को स्पष्ट तौर पर प्रमाणित करना होगा कि संबंधित शिक्षक के विरुद्ध हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियमावली के नियम-7 के तहत कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई या आरोप-पत्र विचाराधीन नहीं है। इसके साथ ही राज्य सतर्कता ब्यूरो (विजिलेंस) या किसी अन्य जांच एजेंसी में शिक्षक के खिलाफ कोई आपराधिक या भ्रष्टाचार संबंधी मामला लंबित नहीं होना चाहिए। इस संबंध में प्राचार्य को कॉलेज रिकॉर्ड और सतर्कता शाखा से क्लीयरेंस सुनिश्चित करनी होगी।

इसके अतिरिक्त, विदेश यात्रा के इच्छुक शिक्षकों से एक वैधानिक अंडरटेकिंग (शपथ पत्र) भी ली जाएगी। इस शपथ पत्र में आवेदक को स्पष्ट रूप से यह वचन देना होगा कि वह स्वीकृत अवकाश अवधि समाप्त होने के बाद विदेश से छुट्टी बढ़ाने का कोई आवेदन नहीं भेजेगा और न ही विदेश प्रवास के दौरान वहां किसी भी प्रकार का रोजगार, व्यावसायिक सेवा या पद ग्रहण करेगा। अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं जहां शिक्षक अध्ययन या निजी अवकाश पर विदेश जाने के बाद सेवा विस्तार मांगते हैं या अनधिकृत रूप से वहीं रुक जाते हैं, जिस पर यह सख्त रोक लगाई गई है।

क्रम संख्याप्रमुख जांच बिंदुप्राचार्य के स्तर पर अनिवार्य दायित्व
1अनुशासनात्मक स्थितिनियम-7 के तहत कोई विभागीय आरोप-पत्र या कार्रवाई लंबित न होने की पुष्टि
2सतर्कता जांच (Vigilance)किसी भी प्रकार का विजिलेंस केस या आपराधिक जांच पेंडिंग न होने का प्रमाण पत्र
3अवकाश विस्तार पर रोकविदेश में प्रवास के दौरान छुट्टी न बढ़ाने संबंधी अनिवार्य अंडरटेकिंग
4विदेशी सेवा/नौकरी प्रतिबंधविदेश में किसी भी निजी या सरकारी सेवा में शामिल न होने का शपथ पत्र
5सेवा पंजिका सत्यापनमहाविद्यालय रिकॉर्ड से सेवा अवधि, आचरण और छुट्टियों का संपूर्ण मिलान

प्रशासनिक व्यवस्था और मुख्यालय की निगरानी

उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पासपोर्ट एनओसी प्राप्त करने के बाद कई बार कर्मचारी बिना सूचना के लंबे समय तक गैरहाजिर रहते हैं जिससे महाविद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य बाधित होता है। नए नियमों का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि उच्च शिक्षा के अकादमिक सत्र पर शिक्षकों के विदेश दौरों का कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

मुख्यालय स्तर पर अब केवल उन्हीं प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा जिनमें प्राचार्य द्वारा हस्ताक्षरित पांचों बिंदुओं का प्रमाण पत्र संलग्न होगा। यदि कोई आवेदन अधूरा या बिना जांचे भेजा जाता है, तो उसे तत्काल निरस्त कर संबंधित कॉलेज प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इससे पहले मुख्यालय में फाइलों का अंबार लग जाता था क्योंकि कॉलेज स्तर पर जरूरी एनओसी और विजिलेंस रिपोर्ट अटैच नहीं की जाती थीं।

महाविद्यालयों के शैक्षणिक वातावरण पर असर

इस फैसले से हरियाणा के राजकीय महाविद्यालयों में प्रशासनिक अनुशासन मजबूत होने की उम्मीद है। कॉलेजों में अक्सर सेमेस्टर परीक्षाओं और महत्वपूर्ण कक्षाओं के दौरान फैकल्टी की कमी की शिकायतें सामने आती हैं। जब शिक्षक विदेश यात्रा के नियमों को लेकर पूरी तरह जवाबदेह होंगे, तो शिक्षण व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।

साथ ही, उन ईमानदार शिक्षकों को भी राहत मिलेगी जिनके एनओसी आवेदन पहले मुख्यालय में अनावश्यक देरी का शिकार होते थे। अब तय चेकलिस्ट होने से प्राचार्यों को स्पष्ट रहेगा कि कौन से दस्तावेज लगाने हैं, जिससे पात्र शिक्षकों की फाइलें समयबद्ध तरीके से मंजूर हो सकेंगी और प्रशासनिक अड़चनों से बचा जा सकेगा।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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