हरियाणा के करनाल जिले के निसिंग क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव धमनहेड़ी से एक बेहद मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां रहने वाले एक साधारण परिवार के 19 वर्षीय बेटे कंवलजीत सिंह ने यूनाइटेड किंगडम (UK) में आत्महत्या कर ली है। इस अप्रत्याशित और दुखद घटना ने पूरे परिवार को अंदर से तोड़कर रख दिया है। महज तीन महीने पहले ही परिवार ने अपनी हैसियत से बढ़कर और करीब 17 लाख रुपए का भारी-भरकम कर्ज लेकर अपने लाडले को बेहतर भविष्य के सुनहरे सपनों के साथ विदेश भेजा था। अब उस परिवार के घर में मातम पसरा हुआ है और माता-पिता की आंखें अपने बेटे का शव आखिरी बार देखने के इंतजार में नम हैं।
यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि उन तमाम ग्रामीण परिवारों के संघर्ष और मानसिक दबाव को भी उजागर करती है जो अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। कंवलजीत अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था। उसके परिवार में पिता सविंद्र सिंह हैं जो दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह घर का गुजारा चलाते हैं, वहीं उसकी मां, बड़ी बहन रमनदीप कौर और भाई हर्षदीप सिंह हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद माता-पिता ने सोचा था कि बेटा विदेश जाकर परिवार के दिन सुधार देगा, लेकिन इस अनहोनी ने सारे सपने पलभर में चकनाचूर कर दिए।
जन्मदिन की खुशियों से लेकर विदेश में खामोश हो जाने तक का घटनाक्रम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंवलजीत सिंह ने बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की थी और उसके सपने बहुत ऊंचे थे। उसने आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाने की इच्छा जताई थी। एजेंट के माध्यम से प्रक्रिया पूरी होने के बाद महज 20 दिन के भीतर उसका वीजा लग गया और वह करीब तीन महीने पहले यूके पहुंचा था। वहां पहुंचने के बाद उसने शुरुआती दिनों में अपने परिजनों से बातचीत की थी। बीते 5 अक्टूबर को ही कंवलजीत का जन्मदिन था, जिसे उसके परिवार ने गांव में और यूके में उसके दोस्तों ने वहां बहुत धूमधाम से मनाया था। किसी को इस बात का आभास तक नहीं था कि जिस बेटे की लंबी उम्र की दुआएं मांगी जा रही हैं, वह कुछ ही दिनों में इस तरह दुनिया छोड़कर चला जाएगा।
घटना वाले दिन यानी 17 अक्टूबर को कंवलजीत रोजाना की तरह अपने काम पर गया था, लेकिन दोपहर बाद वह अचानक वापस अपने कमरे पर लौट आया। इसके बाद उसने यह बेहद खौफनाक कदम उठा लिया। यूके समयानुसार रात करीब 10 बजे वहां पड़ोस में रहने वाली एक भारतीय मूल की महिला के माध्यम से धमनहेड़ी गांव स्थित उसके घर फोन आया। महिला ने परिजनों को सूचना दी कि कंवलजीत ने आत्महत्या कर ली है। सूचना मिलते ही स्थानीय यूके पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की। हालांकि, परिजनों को अभी तक यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाया है कि उसने फंदा लगाया था या कोई अन्य जहरीला पदार्थ खाया था, क्योंकि मौत के असल कारणों की जांच अभी जारी है।
| घटना का पहलू | विवरण / तथ्य |
|---|---|
| युवक का नाम | कंवलजीत सिंह (उम्र 19 वर्ष) |
| मूल निवास स्थान | गांव धमनहेड़ी, जिला करनाल (हरियाणा) |
| घटना स्थल | यूनाइटेड किंगडम (UK) |
| विदेश जाने की अवधि | करीब 3 महीने पहले |
| लिया गया कर्ज | लगभग 17 लाख रुपए |
| परिवार की पृष्ठभूमि | पिता सविंद्र सिंह (दिहाड़ी मजदूर) |
| पारिवारिक कार्यक्रम | फरवरी में बड़ी बहन रमनदीप कौर की शादी |
परिजनों की आखिरी बातचीत और मानसिक तनाव की अनकही दास्तान
घटना से कुछ दिन पहले ही कंवलजीत की अपनी मां और बहन से फोन पर बातचीत हुई थी। मां के मुताबिक, परसों रात ही बेटे से लंबी बात हुई थी और उसने बातचीत में किसी भी बड़ी परेशानी का जिक्र नहीं किया था। मां को क्या पता था कि बेटे के साथ हुई वह आम सी बातचीत उनके जीवन की आखिरी बातचीत साबित होगी। वहीं, पिता सविंद्र सिंह ने भर्राए गले से बताया कि कुछ दिन पहले बेटे ने फोन पर यह जरूर कहा था कि उसका यूके में मन नहीं लग रहा है। तब पिता ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा था कि अगर वहां मन नहीं लग रहा है, तो वह वापस लौट आए, क्योंकि परिवार के लिए बेटे की खुशी और उसका जीवन सबसे बढ़कर है। लेकिन पिता को यह अंदाजा नहीं था कि उनके बेटे के मन में क्या चल रहा है और वह किस कदर मानसिक तनाव से जूझ रहा था।
बड़ी बहन रमनदीप कौर, जिसकी आगामी फरवरी माह में शादी तय है, उसने भी भाई से व्यक्तिगत तौर पर बात की थी। बहन ने भाई को समझाया था कि यदि उसे विदेश रास नहीं आ रहा तो वह वापस आ जाए और उसकी शादी में शामिल हो। बहन ने उसे भरोसा दिलाया था कि उसके पास अभी वैध वीजा है, वह शादी के बाद दोबारा विदेश जा सकता है। उस वक्त कंवलजीत ने बहन से कहा था कि वह बिल्कुल ठीक है और उसे कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। अब बहन के लिए यह यकीन करना नामुमकिन हो रहा है कि जिस भाई के साथ बैठकर उसे अपनी शादी की खुशियां बांटनी थीं, वह अब इस दुनिया में ही नहीं रहा। परिवार इस बात से बेहद दुखी है कि उनका बेटा अपनी कोई भी अंदरूनी परेशानी खुलकर साझा नहीं कर पाया।
शव को भारत लाने की गुहार और शासन-प्रशासन से मदद की उम्मीद
इस हृदयविदारक घटना के बाद धमनहेड़ी गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। घर पर रिश्तेदारों और सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है, लेकिन मां और बहन का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि एक तरफ जवान बेटे को खोने का असहनीय गम है, तो दूसरी तरफ सिर पर 17 लाख रुपए के भारी कर्ज का बोझ है जिसे चुकाने की अब कोई राह नजर नहीं आ रही। इसके साथ ही, सबसे बड़ी चिंता कंवलजीत के पार्थिव शरीर को यूके से वापस भारत लाने की है। गरीब परिवार के पास इतनी आर्थिक क्षमता नहीं है कि वे अपने स्तर पर विदेश से शव लाने का खर्च उठा सकें।
दुखी परिजनों, रिश्तेदारों और स्थानीय ग्रामीणों ने केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और जिला प्रशासन से पुरजोर अपील की है कि वे कूटनीतिक और आधिकारिक स्तर पर मदद करें ताकि कंवलजीत का शव जल्द से जल्द उसके पैतृक गांव धमनहेड़ी पहुंच सके। परिवार सिर्फ इतनी सी आस लगाए बैठा है कि वे अपने लाडले का चेहरा आखिरी बार देख सकें और रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार कर सकें। प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में दूतावास से संपर्क साधने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि औपचारिकताएं पूरी कर शव को स्वदेश भेजा जा सके।





