हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में कचरे के ढेरों से निजात पाने और स्वच्छ भारत अभियान को एक नई दिशा देने के लिए प्रदेश सरकार ने एक क्रांतिकारी योजना पर मुहर लगा दी है। अब शहरों से निकलने वाला कूड़ा न केवल साफ किया जाएगा, बल्कि उससे बिजली का उत्पादन भी होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी 'ऑयल इंडिया' के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। इस पहल के तहत प्रारंभिक चरण में प्रदेश के चार प्रमुख शहरों—गुरुग्राम, हिसार, अंबाला और फरीदाबाद को शामिल किया गया है।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अनुसार, यह परियोजना न केवल कचरा निस्तारण की समस्या का स्थायी समाधान करेगी, बल्कि राज्य के ऊर्जा संकट को दूर करने में भी सहायक सिद्ध होगी। कचरे से बिजली बनाने की यह प्रक्रिया आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित होगी, जिससे पर्यावरण प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा। वर्तमान में इन शहरों में डंपिंग यार्ड्स की बढ़ती समस्या नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी, जिसे अब एक अवसर में बदलने की तैयारी है।
परियोजना का स्वरूप और तकनीकी ढांचा
इस पूरी परियोजना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि कचरा प्रबंधन की इस व्यवस्था में मानवीय हस्तक्षेप को कम कर तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए। इसके लिए 'वेस्ट टू एनर्जी' (Waste to Energy) प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जहां गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कर ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| चयनित प्रथम चरण के शहर | गुरुग्राम, हिसार, अंबाला, फरीदाबाद |
| सहयोगी संस्था | ऑयल इंडिया लिमिटेड (Oil India Limited) |
| तकनीकी प्रेरणा | स्वीडन का कचरा प्रबंधन मॉडल |
| निगरानी प्रणाली | क्यूआर कोड और स्कैनर आधारित ट्रैकिंग |
| कुल शहरी निकाय | 87 (84 में कार्य प्रगति पर) |
स्वीडन मॉडल और डिजिटल निगरानी की शुरुआत
हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में अब कचरा प्रबंधन के लिए विश्व प्रसिद्ध 'स्वीडन मॉडल' को अपनाया जा रहा है। स्वीडन दुनिया का वह देश है जिसने कचरा प्रबंधन में इतनी महारत हासिल की है कि उसे अन्य देशों से कूड़ा आयात करना पड़ता है। इसी तर्ज पर हरियाणा में भी कूड़े के संग्रहण से लेकर उसके ऊर्जा में परिवर्तन तक की पूरी चेन को सुव्यवस्थित किया जाएगा।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने स्कैनर तकनीक का सहारा लिया है। अब घर-घर से कूड़ा उठाने वाले वाहनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। हर घर के बाहर एक विशेष पहचान कोड या स्कैनर प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे यह पता चल सकेगा कि किस घर से कूड़ा उठाया गया है और कहां लापरवाही बरती जा रही है। इससे टेंडर प्राप्त करने वाली कंपनियों की जवाबदेही तय होगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
"हमारा लक्ष्य हरियाणा को कचरा मुक्त बनाना है। ऑयल इंडिया के साथ यह करार प्रदेश की स्वच्छता और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। स्वीडन की तर्ज पर हम आधुनिकतम तकनीक का उपयोग कर रहे हैं ताकि नागरिकों को एक स्वच्छ वातावरण मिल सके।" - विपुल गोयल, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री, हरियाणा
स्थानीय जनजीवन और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव
इस परियोजना के लागू होने से सबसे बड़ा लाभ उन क्षेत्रों को मिलेगा जो वर्तमान में डंपिंग ग्राउंड के पास स्थित हैं। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे महानगरों में कचरे के पहाड़ (Landfills) लंबे समय से प्रशासन के लिए सिरदर्द बने हुए थे। कचरे से बिजली बनने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद इन पहाड़ों का आकार धीरे-धीरे कम होगा और भूजल प्रदूषण में भी कमी आएगी।
इसके अलावा, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था के सुदृढ़ होने से गलियों और सड़कों पर बिखरे रहने वाले कचरे से मुक्ति मिलेगी। स्थानीय निवासियों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी क्योंकि इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा कम होगा और शहर की सुंदरता में निखार आएगा।
भविष्य की योजना और प्रशासनिक कदम
सरकार ने जानकारी दी है कि प्रदेश के कुल 87 शहरी निकायों में से 84 में कूड़ा उठाने की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शेष निकायों में भी जल्द ही इस व्यवस्था को अमलीजामा पहनाया जाएगा। ऑयल इंडिया के साथ हुए समझौते के तहत, प्लांटों की स्थापना और उनके संचालन के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है। प्रशासन अब इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि कचरे का पृथक्करण (Segregation) स्रोत पर ही सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्लांट की दक्षता बनी रहे। आगामी महीनों में अन्य शहरों को भी इस 'वेस्ट टू एनर्जी' ग्रिड से जोड़ने की योजना है।





