हरियाणा के उन किडनी मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है, जिन्हें खून शुद्ध करने की इस जटिल चिकित्सा प्रक्रिया के लिए हर हफ्ते दूरदराज के बड़े शहरों तक लंबी दौड़ लगानी पड़ती थी। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में चिकित्सा ढांचा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कुल 16 सरकारी अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस यूनिट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर टेंडर जारी कर दिए गए हैं, जिसके पूरा होते ही स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को यह जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवा मिलनी शुरू हो जाएगी।
चिकित्सकीय रूप से गंभीर माने जाने वाले किडनी फेलियर के मामलों में डायलिसिस एक अनिवार्य और नियमित प्रक्रिया है, जिसके बिना मरीज का जीवित रहना असंभव होता है। ऐसे रोगियों को आमतौर पर सप्ताह में दो से तीन बार अस्पताल के फेरे लगाने पड़ते हैं। अब तक छोटे और सीमांत तहसीलों के निवासियों को जिला मुख्यालयों या बड़े चिकित्सा संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उनकी जेब पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता था और समय की बर्बादी भी होती थी। इस नई पहल के धरातल पर उतरने से न केवल आम आदमी की परिवहन लागत बचेगी, बल्कि इलाज की प्रक्रिया भी अधिक सुगम हो जाएगी।
कौन से अस्पतालों में मिलगी सुविधा और क्या है पूरी कार्ययोजना
स्वास्थ्य विभाग की इस महत्त्वाकांक्षी योजना के तहत राज्य के विभिन्न जिलों के अंतर्गत आने वाले 15 उपमंडल अस्पतालों (SDH) और एक प्रमुख जिला अस्पताल का चयन किया गया है। इन चिह्नित स्वास्थ्य केंद्रों में अत्याधुनिक डायलिसिस मशीनें, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य आवश्यक चिकित्सीय उपकरण स्थापित किए जाएंगे। प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए गए हैं, और तय समयसीमा के भीतर बुनियादी ढांचा तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
चयनित अस्पतालों की सूची में नारायणगढ़, लाडवा, सिवानी, टोहाना, बल्लभगढ़, पटौदी, असंध, गोहाना, गुहला, नरवाना, महम, डबवाली, कोसली, महेंद्रगढ़ और कनीना जैसे उपमंडल शामिल हैं। इन क्षेत्रों के ग्रामीण परिवेश और छोटे कस्बों से ताल्लुक रखने वाले मरीजों को अब बड़े शहरों के चक्कर काटने की मजबूरी से मुक्ति मिल जाएगी। सरकार का यह कदम दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
| अस्पताल का प्रकार | कुल संख्या | शामिल प्रमुख उपमंडल और क्षेत्र |
|---|---|---|
| उपमंडल अस्पताल (SDH) | 15 | नारायणगढ़, लाडवा, सिवानी, टोहाना, बल्लभगढ़, पटौदी, असंध, गोहाना, गुहला, नरवाना, महम, डबवाली, कोसली, महेंद्रगढ़, कनीना |
| जिला अस्पताल | 1 | योजना के तहत चयनित अन्य प्रमुख जिला स्वास्थ्य केंद्र |
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के निर्देश और पूर्व का रिकॉर्ड
स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. मनीष बंसल ने इस पूरी परियोजना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार की प्राथमिकता आम जनमानस को उनके घर के नजदीक ही उच्च कोटि की स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंचते ही सभी चुनिंदा चिकित्सा इकाइयों में तकनीकी स्टाफ की तैनाती और मशीनों की स्थापना का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा, ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
"डायलिसिस सेवाएं शुरू करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और अस्पतालों में जरूरी मशीनें, उपकरण व अन्य व्यवस्थाएं स्थापित होने के बाद मरीजों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इससे मरीजों और उनके परिजनों का समय और आने-जाने का खर्च बचेगा।" - डॉ. मनीष बंसल, निदेशक, स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार पहले से ही राज्यभर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मोड और अन्य माध्यमों से मुफ्त डायलिसिस सेवाएं संचालित कर रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस कल्याणकारी योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के करीब दो लाख से अधिक किडनी मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। नए उपमंडल अस्पतालों में इन सेवाओं के विस्तार से इस आंकड़े में और अधिक तेजी आने की उम्मीद है।
आम जनता, स्थानीय व्यापारियों और परिवारों पर व्यापक असर
इस प्रशासनिक निर्णय का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण परिवारों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों पर पड़ेगा। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के तीमारदारों को अक्सर अपनी दैनिक आजीविका छोड़कर लंबी यात्राएं करनी पड़ती थीं, जिससे उनकी मानसिक और आर्थिक स्थिति चरमरा जाती थी। स्थानीय स्तर पर डायलिसिस की उपलब्धता होने से मरीजों की शारीरिक थकान कम होगी और वे अपने परिवार के बीच रहकर ही सुगमता से उपचार करा सकेंगे।
चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि जिला अस्पतालों पर पड़ने वाला अत्यधिक दबाव भी इस योजना के क्रियान्वयन के बाद कम होगा। जब उपमंडल स्तर के नागरिक अस्पतालों में ही मरीजों का रूटीन डायलिसिस होने लगेगा, तो बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों और संसाधनों का उपयोग अधिक गंभीर और आपातकालीन मामलों के लिए किया जा सकेगा। यह सुधारात्मक कदम हरियाणा के स्वास्थ्य ढांचे को अधिक विकेंद्रीकृत और जन-सुलभ बनाने में एक मजबूत कड़ी साबित होगा।





