राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को और अधिक धार देने के लिए हरियाणा सरकार ने एक अहम प्रशासनिक कदम उठाया है। अब शासन के विभिन्न अंगों और राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में किसी भी तरह की सुस्ती या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में एक विशेष राजपत्रित अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किए जाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्य स्तर से उठाए गए इस कदम का सीधा असर प्रशासनिक जवाबदेही पर पड़ेगा।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से इस संबंध में एक औपचारिक पत्र सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और अन्य संबंधित अधिकारियों को प्रेषित कर दिया गया है। इस निर्देश के तहत नामित किए जाने वाले नोडल अधिकारी की यह मुख्य जिम्मेदारी होगी कि वह राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की तरफ से लिखित पत्राचार के माध्यम से मांगी जाने वाली तमाम जानकारियों का संकलन करें। साथ ही, ब्यूरो के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर समयबद्ध तरीके से साक्ष्य और दस्तावेज मुहैया करवाएं, ताकि मामलों की जांच में अनावश्यक रुकावटें न आएं।
| प्रशासनिक प्रावधान | कार्यान्वयन विवरण व समयसीमा |
|---|---|
| नोडल अधिकारी की श्रेणी | प्रत्येक सरकारी विभाग में नियुक्त राजपत्रित (Gazetted) अधिकारी |
| सूचना भेजने की समयसीमा | सतर्कता ब्यूरो का लिखित अनुरोध मिलने के 48 घंटे के भीतर |
| विवरण भेजने की अंतिम अवधि | निर्देश जारी होने के 15 दिनों के भीतर |
| किसे भेजना होगा विवरण | सतर्कता विभाग तथा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक |
प्रशासनिक गलियारों में इस नए फरमान को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है। पूर्व में कई मामलों में यह देखने को मिला था कि सतर्कता जांच के दौरान विभिन्न विभागों से फाइलें या रिकॉर्ड समय पर न मिलने के कारण मामलों की गति धीमी पड़ जाती थी। इसी पत्राचार संबंधी और कागजी विलंब को समाप्त करने के लिए सरकार ने अब समय सीमा तय कर दी है। नए आदेशों के अनुसार, जैसे ही सतर्कता ब्यूरो की तरफ से किसी भी प्रकार की सूचना या दस्तावेज की मांग की जाएगी, संबंधित विभाग के नोडल अधिकारी की यह नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी होगी कि वह व्यावहारिक रूप से संभव न्यूनतम समय यानी 48 घंटे के भीतर उस रिपोर्ट को सौंपे।
"राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा लिखित पत्राचार के माध्यम से मांगी गई सूचनाओं के लिए समन्वय स्थापित करने और ऐसी सूचनाएं 48 घंटे के भीतर उपलब्ध करवाने के लिए हर विभाग में राजपत्रित अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया जाए।" - मुख्य सचिव कार्यालय, हरियाणा सरकार
प्रशासनिक कसावट और अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही
इस नई व्यवस्था के तहत किसी भी विभाग के लिए लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सभी संबंधित विभागों को अपने यहां नियुक्त किए जाने वाले नोडल अधिकारी का पूरा बायोडाटा, जिसमें उनका नाम, वर्तमान पदनाम, आधिकारिक मोबाइल नंबर और वैैध ई-मेल आईडी शामिल हो, तय समयसीमा के भीतर भेजना अनिवार्य होगा। यह पूरी जानकारी निर्देश जारी होने की तिथि से मात्र 15 दिनों के भीतर सतर्कता विभाग के साथ-साथ राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक (DGP) के कार्यालय में दर्ज करानी होगी।
विभागों द्वारा यह विवरण उपलब्ध हो जाने के बाद पत्राचार की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और त्वरित हो जाएगी। यदि भविष्य में किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की कोई शिकायत मिलती है और सतर्कता ब्यूरो उसके रिकॉर्ड की मांग करता है, तो नोडल अधिकारी के माध्यम से फाइल सीधे और बिना किसी लालफीताशाही के जांच एजेंसी तक पहुंच जाएगी। जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा और भ्रष्ट तत्वों में कानून का खौफ बढ़ेगा।





