हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने पंचकूला के पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह में जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान प्रशासनिक महकमे में उस समय खलबली मच गई जब मंत्री ने शहर में बढ़ते अवैध कब्जों और अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। जनता की शिकायतों के निस्तारण में कोताही बरतने वाले विभागीय अमले को आड़े हाथों लेते हुए मंत्री ने त्वरित और कड़े प्रशासनिक कदम उठाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
बैठक की शुरुआत से ही स्थानीय नागरिकों की लंबित शिकायतों पर चर्चा का दौर शुरू हुआ। जैसे ही अवैध अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण से जुड़े मामले पटल पर आए, मंत्री कृष्ण लाल पंवार का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कालका नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में अनधिकृत निर्माणों को रोकने में नाकाम रहने और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई न करने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत प्रभाव से कालका नगर परिषद के कनिष्ठ अभियंता और म्युनिसिपल इंजीनियर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश पारित किए।
बैठक के प्रमुख प्रशासनिक निर्णय और बिंदु
| मुद्दा / घटना | संबंधित अधिकारी / व्यक्ति | प्रशासनिक कार्रवाई / निर्णय |
|---|---|---|
| अवैध कब्जे की अनदेखी | JE और ME, नगर परिषद कालका | कारण बताओ नोटिस जारी |
| शिकायत पर निष्क्रियता | जिला नगर योजनाकार (DTP) विभाग | मामले की विस्तृत समीक्षा के निर्देश |
| नागरिक शिकायत समाधान | हरबंस सिंह (निवासी ढंडारढू) | मामले में त्वरित कार्रवाई का आदेश |
| समिति की मध्यस्थता | पूर्व स्पीकर एवं डीसी सतपाल शर्मा | मंत्री द्वारा विवाद का शांतिपूर्ण समाधान |
इस समीक्षा बैठक के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई जब ढंडारढू गांव के निवासी हरबंस द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर डीटीपी (जिला नगर योजनाकार) विभाग की निष्क्रियता का मुद्दा उठा। बैठक में मौजूद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि संबंधित विभाग द्वारा औपचारिकता के तौर पर नोटिस तो थमा दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती क्योंकि इसमें कथित तौर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत शामिल है। इस तीखे आरोप के बाद प्रशासनिक बचाव में उतरे डीसी सतपाल शर्मा ने आपत्ति जताई और कहा कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर इस तरह सवाल उठाना उचित नहीं है, क्योंकि वे लगातार मैदानी स्तर पर मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और बढ़ते तनाव को देखते हुए विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने तुरंत हस्तक्षेप किया। मंत्री ने दोनों पक्षों को शांत कराते हुए मामले को तूल देने से रोका और व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आपसी समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि जनता के अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटकती रहेगी।
"अवैध कब्जों और जनता की शिकायतों के प्रति लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच में दोषी मिलने पर सीधे सख्त एक्शन लिया जाएगा ताकि प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।" - कृष्ण लाल पंवार, विकास एवं पंचायत मंत्री, हरियाणा सरकार
प्रशासनिक जवाबदेही और भविष्य की रूपरेखा
पंचकूला जिले में बढ़ते अवैध अतिक्रमण और अनधिकृत कॉलोनियों के पनपने का मुद्दा लंबे समय से तूल पकड़ता रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कागजी कार्रवाई और नोटिस के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है, जबकि धरातल पर अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी रहते हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद जिला प्रशासन पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के निष्पक्षता से जांच करे और दोषियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई या कानूनी शिकंजा कसे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की बैठकों में लिए गए निर्णयों का क्रियान्वयन ईमानदारी से हो, तो आम जनता का सरकारी तंत्र पर भरोसा मजबूत होगा। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच इस प्रकार की तनातनी यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी कितनी सुस्त हो चुकी है। अब देखने यह होगा कि नोटिस मिलने के बाद आरोपी अभियंता क्या जवाब देते हैं और डीटीपी विभाग आगामी दिनों में अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाता है।





