हरियाणा के हिसार जिले में स्थित ऐतिहासिक अग्रोहा धाम में आयोजित 43वें शरद पूर्णिमा मेले के दौरान रविवार को उस समय अप्रिय स्थिति पैदा हो गई, जब सुप्रसिद्ध हरियाणवी गायक मासूम शर्मा ने मंच पर प्रस्तुति देने से इनकार कर दिया। इस घोषणा के बाद मेले में मौजूद हजारों प्रशंसक भड़क गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि जब मासूम शर्मा कार्यक्रम स्थल से निकलने लगे, तो युवाओं की भीड़ ने नेशनल हाईवे पर उनकी कार का पीछा किया और उसे रोकने की कोशिश की।
अग्रोहा धाम में वैश्य समाज के इस भव्य समागम में मासूम शर्मा को सुनने के लिए प्रदेश के विभिन्न कोनों से युवा पहुंचे थे। आयोजकों द्वारा किए गए प्रचार के कारण लोगों में भारी उत्साह था, लेकिन जब मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का समय आया, तो गायक ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए माइक थामने से मना कर दिया। इससे आयोजन की गरिमा पर भी असर पड़ा और प्रशासन को भीड़ को नियंत्रित करने में खासी मशक्कत करनी पड़ी।
राज्यपाल के भाषण के दौरान हुई हूटिंग, सुरक्षा घेरे में निकले वीआईपी
मेले के मुख्य सम्मेलन में जब हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता अपना संबोधन देने के लिए मंच पर आए, तो दर्शक दीर्घा में मौजूद युवाओं ने शोर मचाना शुरू कर दिया। प्रशंसक लगातार मासूम शर्मा के गानों की मांग कर रहे थे। शोर और हूटिंग इतनी अधिक थी कि राज्यपाल को अपना संबोधन संक्षिप्त करना पड़ा। उन्होंने महज एक मिनट में अपनी बात पूरी की और मंच से नीचे उतर गए। इसके बाद वहां मौजूद अन्य विशिष्ट अतिथि भी सुरक्षा के बीच प्रशासनिक कार्यालय की ओर चले गए।
| विवरण | तथ्य एवं जानकारी |
|---|---|
| आयोजन का नाम | 43वां शरद पूर्णिमा मेला, अग्रोहा धाम |
| मुख्य अतिथि | राज्यपाल (हिमाचल प्रदेश) |
| विवाद का केंद्र | गायक मासूम शर्मा की प्रस्तुति न होना |
| घटना स्थल | अग्रोहा धाम एवं नेशनल हाईवे, हिसार |
| प्रबंधन व्यवस्था | 50 बसें, 20 एकड़ पार्किंग, 100 स्वागत द्वार |
गायक का स्पष्टीकरण: 'धार्मिक आयोजनों में नहीं गाता'
प्रशंसकों के भारी दबाव के बीच मासूम शर्मा ने अंततः माइक संभाला, लेकिन उन्होंने गाने के बजाय अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने मंच से कहा कि उनका गला खराब है और वह गायकी करने की स्थिति में नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने एक नया तर्क देते हुए कहा कि वे आमतौर पर धार्मिक कार्यक्रमों में गायन नहीं करते हैं। इतना कहकर वे तुरंत मंच से नीचे उतर गए और अपनी निजी गाड़ी की ओर बढ़ गए।
"मेरा गला खराब है और मैं धार्मिक कार्यक्रमों में गायकी नहीं करता हूं। मैं केवल उपस्थिति दर्ज कराने आया था।" - मासूम शर्मा (मंच से दिया गया बयान)
नेशनल हाईवे पर फिल्मी ड्रामे जैसी स्थिति
जैसे ही मासूम शर्मा धाम परिसर से बाहर निकलकर अपनी गाड़ी में बैठे, उनके पीछे नाराज प्रशंसकों का हुजूम दौड़ पड़ा। सिंगर की गाड़ी जब अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के सामने नेशनल हाईवे पर यू-टर्न ले रही थी, तब दर्जनों युवाओं ने कार को घेरने और रोकने का प्रयास किया। युवाओं का आरोप था कि आयोजकों ने गायक के नाम पर भीड़ जुटाई, लेकिन कलाकार ने उनका मनोरंजन करने के बजाय उन्हें निराश किया। हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, जिसे मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने बमुश्किल सुचारू करवाया।
अग्रोहा धाम प्रबंधन और व्यापक व्यवस्थाएं
अग्रोहा धाम वैश्य समाज के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने बताया कि मेले के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे थे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 50 निःशुल्क बसें और 20 एकड़ में पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, मासूम शर्मा प्रकरण ने मेले के सांस्कृतिक पक्ष को थोड़ा फीका कर दिया। प्रबंधन का कहना है कि वे केवल समाज को जोड़ने और धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के लिए इस मेले का आयोजन करते हैं, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ भाईचारा बढ़ाना होता है।
स्थानीय पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस हंगामे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। राज्यपाल जैसे वीआईपी की मौजूदगी में हूटिंग होना और उसके बाद हाईवे पर गायक की गाड़ी के पीछे भीड़ का दौड़ना सुरक्षा चूक की ओर इशारा करता है। स्थानीय पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है कि क्या भीड़ को उकसाने में किसी शरारती तत्व का हाथ था या यह केवल प्रशंसकों की स्वाभाविक नाराजगी थी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना की चर्चा पूरे हरियाणा में हो रही है।





