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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में नियमित हुए 184 कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का तोहफा, हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 1983 से 2003 के बीच नियुक्त और बाद में नियमित हुए 184 कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पुरानी पेंशन का लाभ देने के।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
21 अक्टूबर 2026 को 10:52 am बजे2 मिनट पठन1 व्यूज
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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में नियमित हुए 184 कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का तोहफा, हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •माननीय हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने जगदीश व अन्य की याचिका पर सुनाया ऐतिहासिक फैसला।
  • •वर्ष 1983 से 2003 के दौरान अंशकालिक तौर पर भर्ती हुए कर्मचारियों की सेवाएं बाद में नियमित की गई थीं।
  • •अदालत ने प्रारंभिक नियुक्ति से नियमितीकरण तक की संपूर्ण सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा मानने को कहा।
  • •कर्मचारियों के एनपीएस खातों को बंद कर सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खाते खोलने के भी निर्देश दिए गए हैं।

हरियाणा के सरकारी विद्यालयों में अंशकालिक भूमिकाओं से अपनी पेशेवर यात्रा शुरू करने वाले और बाद में नियमित पदों पर आए कार्मिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी राहत सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्य के शिक्षा विभाग और प्रशासनिक तंत्र को कड़े निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि इन कर्मचारियों की प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से ही पेंशन लाभों की गणना की जाएगी। इस महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप से उन 184 याचिकाकर्ता कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) के दायरे में आने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जो लंबे समय से अपनी पिछली सेवाओं को जोड़ने की मांग को लेकर संघर्षरत थे। यह निर्णय राज्य प्रशासनिक गलियारों में एक बड़ी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि इससे प्रभावित वर्ग को दिवाली से ठीक पहले एक बहुत बड़ी वित्तीय और मानसिक राहत मिली है।

न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत द्वारा यह फैसला याचिकाकर्ता जगदीश एवं अन्य की तरफ से दायर की गई रिट याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया गया है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष पुरजोर तरीके से यह पक्ष रखा था कि उनके मुवक्किलों ने न केवल दशकों तक अत्यंत अल्प मानदेय पर अपनी सेवाएं दीं, बल्कि राज्य सरकार की ओर से जारी विभिन्न नियमितीकरण नीतियों के तहत उन्हें अलग-अलग चरणों में पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिला। हालांकि, विभाग द्वारा उनकी पिछली अंशकालिक या तदर्थ सेवाओं को पेंशनरी लाभों और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले वित्तीय उपदान की गणना से बाहर रखा जा रहा था, जिसके विरुद्ध उन्होंने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया था।

कानूनी संघर्ष और अदालत द्वारा तय किया गया सेवा-क्रम

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में वे ऐतिहासिक प्रशासनिक नीतियां जुड़ी हैं जिनके तहत हरियाणा सरकार ने 11 नवंबर 2003 और 27 फरवरी 2004 को अपने यहां कार्यरत विभिन्न अंशकालिक कर्मियों को नियमित किया था। इन कर्मचारियों का मुख्य तर्क यह था कि जब वे सरकारी सेवा में निरंतर रूप से कार्यरत थे, तो नियुक्ति के प्रारंभिक चरण से लेकर नियमितीकरण तक के कालखंड को उनकी सेवा-पुस्तिका से बाहर करना सरासर अन्याय है। न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने तमाम कानूनी पक्षों, तर्कों और पूर्ववर्ती फैसलों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद माना कि अंशकालिक, दैनिक वेतन भोगी या तदर्थ प्रकृति की निरंतर सेवा को यदि बाद में नियमित कर दिया जाता है, तो उस शुरुआती काल को पेंशन के प्रयोजन से अलग नहीं किया जा सकता है।

अदालत के इस स्पष्ट निर्देश के बाद अब राज्य के संबंधित विभागों को इन 184 कर्मचारियों के मामलों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करनी होगी। न्यायिक आदेश में यह भी निहित है कि जिन कार्मिकों के खाते अब तक नई पेंशन योजना (NPS) के तहत संचालित हो रहे थे, उन्हें प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बंद किया जाए और उनके स्थान पर सामान्य भविष्य निधि (GPF) खाते खोले जाएं। इसके अलावा, सेवाकाल के दौरान मिलने वाले सभी प्रकार के सेवानिवृत्ति लाभ, पेंशन निर्धारण और वित्तीय उपदान की गणना अब उनकी पहली बार हुई कार्यभार ग्रहण करने की तिथि के आधार पर ही सुनिश्चित की जाएगी, जिससे उनके भविष्य की आजीविका पूरी तरह सुरक्षित हो सकेगी।

मुद्दा / विवरणन्यायिक एवं प्रशासनिक तथ्य
फैसला देने वाले न्यायाधीशमाननीय न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़
मुख्य याचिकाकर्ताजगदीश एवं अन्य
लाभान्वित कर्मचारियों की संख्या184 सरकारी स्कूल कर्मचारी
प्रारंभिक नियुक्तियों का कालखंडवर्ष 1983 से 2003 के बीच
आधारभूत प्रशासनिक नीतियां11 नवंबर 2003 और 27 फरवरी 2004 की नियमितीकरण नीतियां
प्रमुख निर्देशप्रारंभिक नियुक्ति से सेवा जोड़ना और जीपीएफ खाते खोलना

प्रशासनिक और कानूनी निहितार्थ

इस अदालती फैसले के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए यह संघर्ष केवल कागजी नहीं बल्कि उनके संपूर्ण जीवन के वित्तीय भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा था। उच्च न्यायालय के इस सख्त रुख से यह संदेश भी स्पष्ट हो गया है कि यदि प्रारंभिक तौर पर सेवा की प्रकृति कैसी भी रही हो, लेकिन यदि कर्मचारी ने विभाग में निरंतरता बनाए रखी है और बाद में उसे नियमित किया गया है, तो उसे पुरानी सेवा के लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार के कानूनी सलाहकारों और वित्त विभाग के अधिकारियों के बीच अब इस आदेश को समयबद्ध तरीके से लागू करने को लेकर मंथन शुरू हो चुका है, ताकि अदालती अवमानना की स्थिति से बचा जा सके और पात्र कार्मिकों को उनके हक का भुगतान मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों में ऐसे अन्य कई कर्मचारी भी कार्यरत हैं जो इसी तरह की विसंगतियों का सामना कर रहे हैं। इस नज़ीर के सामने आने के बाद अन्य अदालतों और ट्रिब्यूनल्स में लंबित पड़े समान प्रकृति के मामलों में भी याचिकाकर्ताओं को मजबूत कानूनी आधार मिलने की पूरी उम्मीद है। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को अब निर्देशानुसार सभी 184 याचिकाओं से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कर उनके पेंशन कागजात तैयार करने की प्रक्रिया को तेज करना होगा, जिससे इस कानूनी लड़ाई का सकारात्मक और तार्किक अंत हो सके।

स्थानीय जनजीवन और कर्मचारियों के बीच खुशी की लहर

इस ऐतिहासिक फैसले के आने के बाद से ही हरियाणा भर के शैक्षणिक संस्थानों और कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर दौड़ गई है। पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र और जीटी रोड बेल्ट सहित पूरे प्रदेश में उन तमाम कर्मियों ने राहत की सांस ली है जो अपनी सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय असुरक्षा के साये में जी रहे थे। शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि न्यायपालिका ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि लंबे समय तक ईमानदारी से सेवा देने वाले निचले स्तर के कर्मचारियों के साथ न्याय होना ही चाहिए।

त्योहारों के इस सीजन में मिले इस कानूनी तोहफे ने कर्मचारियों के घरों में दीपावली के जश्न को दोगुना कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार कितनी जल्दी इस आदेश की अनुपालना रिपोर्ट तैयार कर अदालती निर्देशों के अनुरूप वित्तीय लाभों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को धरातल पर उतारती है। इस निर्णय से न केवल इन 184 परिवारों का भविष्य सुरक्षित हुआ है, बल्कि उन हजारों अन्य अंशकालिक कर्मियों को भी एक नई उम्मीद की किरण मिली है जो वर्षों से अपने अधिकारों के लिए कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर डटे हुए हैं।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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