हरियाणा के ऊर्जा सेक्टर में उस वक्त हलचल तेज हो गई है जब विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा आज रात से अनिश्चितकालीन अथवा सांकेतिक हड़ताल पर जाने का ऐलान किया गया है। राज्य की विद्युत व्यवस्थाओं को पटरी से उतरने से बचाने के लिए हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (HVPNL) ने मोर्चा संभाल लिया है। विभाग के उच्च अधिकारियों की तरफ से एक नया और बेहद सख्त प्रशासनिक आदेश प्रसारित किया गया है, जिसके तहत तमाम मैदानी अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना न करना पड़े और ग्रीड से लेकर सब-स्टेशनों तक का कामकाज सामान्य गति से चलता रहे।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बिजली कर्मियों के इस आंदोलन को लेकर जिला प्रशासन और पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने कमर कस ली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हड़ताल के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए वरिष्ठ अभियंताओं (Engineers) और प्रशासनिक समन्वयकों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। किसी भी संभावित व्यवधान को रोकने के लिए संवेदनशील ग्रिड्स और ट्रांसमिशन लाइनों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि औद्योगिक इकाइयों, अस्पतालों और घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली आपूर्ति में कोई रुकावट न आए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनहित से जुड़ी इस अत्यावश्यक सेवा में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
| विभाग / संस्था | जारी किया गया निर्देश | संभावित प्रभाव क्षेत्र | वर्तमान प्रशासनिक स्थिति |
|---|---|---|---|
| HVPNL (हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड) | कर्मचारियों की हड़ताल के मद्देनजर सख्त दिशा-निर्देश और वैकल्पिक कार्ययोजना | संपूर्ण हरियाणा (सभी सर्कल और सब-स्टेशन) | उच्च अधिकारीयों की सीधी निगरानी, हाई अलर्ट मोड एक्टिव |
प्रशासनिक हलकों में इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि हड़ताल के आह्वान के बावजूद राज्य के किसी भी हिस्से में ब्लैकआउट या ट्रांसमिशन फेलियर जैसी स्थिति न पैदा हो। इसके लिए तकनीकी रूप से दक्ष संविदा कर्मचारियों और अन्य वैकल्पिक संसाधनों की मदद लेने की रूपरेखा भी तैयार की जा चुकी है। स्थानीय स्तर पर विद्युत निगम के कार्यालयों में कंट्रोल रूम स्थापित किए जा रहे हैं, जहां से चौबीसों घंटे फीडर्स की मॉनिटरिंग की जाएगी। विभाग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी अपने कर्तव्य से अनुपस्थित रहकर प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासनिक तैयारी और अधिकारियों की भूमिका
विद्युत निगम के उच्च प्रबंधन ने सभी अधीक्षक अभियंता (SEs) और कार्यकारी अभियंता (XENs) को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यक्तिगत तौर पर स्थिति का जायजा लें। स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है ताकि पावर हाउस और ग्रिड स्टेशनों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा सकें। किसी भी आपातकालीन स्थिति में तकनीकी खराबी को तुरंत दुरुस्त करने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (Quick Response Teams) को भी तैयार रखा गया है ताकि बिजली लाइनों में आने वाली बाधाओं को तुरंत प्रभाव से दूर किया जा सके।
राज्य भर में बिजली वितरण निगमों के दफ्तरों में वरिष्ठ अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं या उन्हें मुख्यालय छोड़ने पर रोक लगा दी गई है। जांच दलों और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर एक गतिविधि पर पैनी नजर रखें। उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए कस्टमर केयर और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है ताकि यदि कहीं से स्थानीय फाल्ट की सूचना मिले, तो उसका निवारण तुरंत किया जा सके।
आम जनजीवन और औद्योगिक क्षेत्रों पर संभावित असर
बिजली कर्मचारियों की इस प्रस्तावित हड़ताल का सीधा असर राज्य के आम नागरिकों, किसानों और विशेष तौर पर औद्योगिक बेल्ट (जैसे जीटी रोड बेल्ट,मानेसर, फरीदाबाद, पानीपत आदि) पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार और निगम प्रशासन यह दावा कर रहा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिलती रहेगी, फिर भी औद्योगिक इकाइयों में इस बात को लेकर चिंता बनी हुई है कि यदि उत्पादन प्रभावित हुआ तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा, धान के सीजन और कृषि कार्यों से जुड़े इलाकों में भी बिजली की निरंतरता बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
यात्रियों और स्थानीय निवासियों को भी यह सलाह दी गई है कि वे किसी भी असुविधा से बचने के लिए अपने स्थानीय बिजली उप-केंद्र के संपर्क में रहें। नागरिक प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। आने वाले घंटों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कर्मचारी संगठनों और शासन के बीच बातचीत का कोई सकारात्मक दौर निकलता है या यह गतिरोध और अधिक गहराता है।





