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उचाना में राजनीतिक सरगर्मी तेज: कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया की तीखी प्रतिक्रिया

उचाना में राजनीतिक हलचल के बीच कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने बीरेंद्र सिंह परिवार पर साधा निशाना, वीरेंद्र घोघड़िया को पार्टी में वापस लाने की उठाई मांग।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
22 अक्टूबर 2026 को 01:28 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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उचाना में राजनीतिक सरगर्मी तेज: कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया की तीखी प्रतिक्रिया
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने उचाना के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस का दौरा किया।
  • •उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और बृजेंद्र सिंह पर तीखा राजनीतिक हमला बोला।
  • •बागी नेता वीरेंद्र घोघड़िया को दोबारा पार्टी में शामिल कराने के लिए हाईकमान से गुहार लगाने की कही बात।
  • •2024 विधानसभा चुनाव में उचाना सीट पर कांग्रेस के टिकट वितरण और परिणामों को लेकर छिड़ा है विवाद।

हरियाणा की राजनीति में उचाना विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर बड़े सियासी घटनाक्रम का केंद्र बन गया है। सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया के उचाना पहुंचने के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और उनके राजनीतिक खेमे के साथ चल रहे जुबानी टकराव के बीच विधायक सेतिया सीधे स्थानीय सर्किट हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी के भीतर और बाहर मची उथल-पुथल पर खुलकर अपनी बात रखी। इस दौरान उनके साथ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे नेता वीरेंद्र घोघड़िया भी प्रमुखता से मौजूद रहे।

इस दौरे का मुख्य आकर्षण गोकुल सेतिया का वह बयान रहा जिसमें उन्होंने विरोधी खेमे द्वारा सोशल मीडिया पर दी जा रही चेतावनियों का जिक्र किया। सेतिया ने स्पष्ट शब्दों में चुनौती स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें उचाना न आने की धमकी दी जा रही थी, लेकिन वे अब इसी क्षेत्र में मौजूद हैं। उन्होंने पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह और उनके पिता पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग अपने पारिवारिक दायित्वों और महान सुधारक सर छोटूराम के वैचारिक सिद्धांतों पर खरे नहीं उतरे, वे कांग्रेस पार्टी की विचारधारा के प्रति निष्ठावान कैसे हो सकते हैं। इस बयान ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है और दोनों पक्षों के बीच की खटास को सतह पर ला दिया है.

चुनावी बगावत और वीरेंद्र घोघड़िया की वापसी की मांग

गत वर्ष संपन्न हुए 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान उचाना सीट पर टिकट का समीकरण खासा पेचीदा रहा था। वीरेंद्र घोघड़िया इस सीट से कांग्रेस के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, परंतु पार्टी ने ऐन मौके पर भाजपा छोड़कर आए पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके परिणामस्वरुप घोघड़िया ने निर्दलीय ताल ठोकते हुए करीब साढ़े इकत्तीस हजार मत हासिल किए, जबकि बृजेंद्र सिंह बेहद कम अंतर यानी मात्र 32 वोटों से भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र अत्री से चुनाव हार गए। इस राजनीतिक उठापटक के बाद अब गोकुल सेतिया ने घोघड़िया की वकालत करते हुए उन्हें पार्टी में पुनःसम्मानित स्थान दिलाने का बीड़ा उठाया है।

राजनीतिक हस्ती / नेतासंबंधित निर्वाचन क्षेत्र / दलवर्तमान राजनीतिक भूमिका
गोकुल सेतियासिरसा / कांग्रेस पार्टीकांग्रेस विधायक
बीरेंद्र सिंह परिवारउचाना / पूर्व भाजपा-कांग्रेसवरिष्ठ राजनीतिक परिवार
वीरेंद्र घोघड़ियाउचाना / निर्दलीय (पूर्व कांग्रेस दावेदार)स्थानीय बागी नेता

गोकुल सेतिया ने जोर देकर कहा कि कठिन समय में भी जिन जमीनी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के संगठन को थामे रखा, उन्हें उचित प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले और अवसर आने पर पाला बदलने वाले नेताओं के बीच का फर्क कांग्रेस हाईकमान भली-भांति समझता है। उन्होंने घोषणा की है कि वे वीरेंद्र घोघड़िया की कांग्रेस में घर वापसी के लिए जरूरत पड़ने पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष पैर पकड़कर भी गुजारिश करेंगे ताकि धरातल पर संगठन को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

जो लोग अपने परिवार और सर छोटूराम के नहीं हुए, वे कांग्रेस के कैसे हो सकते हैं। हमारा पूरा प्रयास रहेगा कि संघर्षशील कार्यकर्ताओं को उनका हक मिले।

पार्टी निष्ठा और व्यक्तिगत दूरियों का सियासी असर

यह पूरा विवाद केवल वैचारिक मतभेदों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत निजी कार्यक्रमों से जुड़ी दूरियों के कारण हुई थी। गोकुल सेतिया और बृजेंद्र सिंह के बीच दूरियां तब गहरी हुईं जब बृजेंद्र सिंह सेतिया के भाई की शादी के समारोह में उपस्थित नहीं हो सके। इसके पीछे उनकी व्यस्त सद्भावना यात्रा का हवाला दिया गया था, जिससे आहत होकर सेतिया ने भी सिरसा में उक्त यात्रा से किनारा कर लिया था। इसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया, जो अब उचाना की स्थानीय राजनीति का मुख्य केंद्र बन चुका है।

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को नसीहत देते हुए सेतिया ने कहा कि उन्हें विपक्षी दल की अंदरूनी राजनीति पर टिप्पणी करने के बजाय अपने घर की फिक्र करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व हर एक कार्यकर्ता की सक्रियता और निष्ठा पर पैनी नजर रखता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग पार्टी के विधायकों के विरुद्ध सार्वजनिक मंचों से अनर्गल बयानबाजी करते हैं और बाद में सद्भावना का आवरण ओढ़ लेते हैं, उनकी असलियत जनता और कार्यकर्ता अच्छी तरह पहचानते हैं।

भविष्य की राजनीतिक दिशा और प्रशासनिक हलचल

आगामी दिनों में उचाना की यह सियासी रस्साकशी हरियाणा कांग्रेस के भीतर आंतरिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकती है। एक तरफ जहां बागी नेताओं की वापसी को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर जाट राजनीति के दिग्गजों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी खुलकर सामने आ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हाईकमान इस मामले में हस्तक्षेप कर असंतोष को शांत नहीं करता है, तो आने वाले स्थानीय निकाय और सांगठनिक चुनावों में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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