हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद से गुजरने वाली ऐतिहासिक दिल्ली-आगरा नहर स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़े खतरे का कारण बनती जा रही है। इस प्रमुख जलमार्ग के दोनों छोरों पर सुरक्षात्मक बैरिकेडिंग, मजबूत बाउंड्री वॉल और सुरक्षा जाल का भारी अभाव देखा जा रहा है। नतीजा यह है कि आमजन की इस तक सीधी पहुंच बनी हुई है, जिससे अनियंत्रित हादसों और डूबने की घटनाओं पर लगाम लगाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। केवल पुलिस गश्त के भरोसे इन गंभीर दुर्घटनाओं को रोक पाना नाकाफी साबित हो रहा है, जिससे इलाके में गहरी चिंता का माहौल है।
ब्रिटिश शासनकाल वर्ष 1874 में ओखला बैराज से निकाली गई इस नहर का मुख्य उद्देश्य कृषि भूमि की सिंचाई करना है, लेकिन फरीदाबाद के घनी आबादी वाले पुराने क्षेत्र और तेजी से विकसित हो रहे ग्रेटर फरीदाबाद के बीच से गुजरने के कारण इसकी सुरक्षा का पहलू अत्यंत संवेदनशील हो चुका है। रिहायशी बस्तियों और व्यस्त सड़कों के बीच से निकलने वाली इस नहर के आसपास सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी किसी बड़े खतरे को खुला निमंत्रण दे रही है।
नहर के किनारों पर पसरा मौत का साया और प्रत्यक्षदर्शियों के खुलासे
नहर के आसपास रोजाना आवागमन करने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा के पुख्ता साधन न होने के कारण यह जलमार्ग जानलेवा साबित हो रहा है। क्षेत्र के निवासी विकास चौहान ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि पानी में डूबकर दम तोड़ने वाले पीड़ितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी बड़ी अनहोनी को टालने के लिए तुरंत दोनों किनारों पर मजबूत सुरक्षा जाल कसे जाएं ताकि कोई भी व्यक्ति आसानी से पानी तक न पहुंच सके।
एक अन्य स्थानीय नागरिक देवेंद्र ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे रोजाना इस मार्ग से गुजरते हैं और कई बार मानसिक तनाव या पारिवारिक कलह के शिकार लोगों को इस खौफनाक कदम की ओर बढ़ते हुए अपनी आंखों से देख चुके हैं। हालिया दिनों में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें लोगों के नहर में कूदने के बाद उनके शव बरामद किए गए। निवासियों का जोर इस बात पर है कि संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां फौरन ठोस दीवारें या बैरिकेड्स खड़े किए जाने चाहिए।
| नहर का विवरण | ऐतिहासिक तथ्य / वर्तमान स्थिति | पहचाना गया मुख्य जोखिम | संबंधित प्रशासनिक पक्ष |
|---|---|---|---|
| नाम एवं उद्गम | दिल्ली-आगरा नहर (आगरा कैनाल), ओखला बैराज से आरंभ | किनारों तक आम जनता की खुली और सीधी पहुंच | उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग |
| निर्माण वर्ष | वर्ष 1874 (ब्रिटिश शासनकाल के दौरान चालू) | सुरक्षा जाल, रेलिंग और बैरिकेडिंग का पूर्ण अभाव | जिला प्रशासन फरीदाबाद |
| भौगोलिक स्थिति | फरीदाबाद के पुराने हिस्से व ग्रेटर फरीदाबाद के मध्य | सप्ताह में दो से तीन डूबने की घटनाओं का अनुमान | हरियाणा सड़क निर्माण विभाग |
प्रशासनिक और विभागीय प्रतिक्रिया: सड़क निर्माण के साथ जुड़े हैं सुरक्षा प्लान
इस पूरे मामले पर जब उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एसडीओ एके जैन से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि नहर के सुदृढ़ीकरण और सुरक्षा को लेकर उच्च स्तर पर विचार-विमर्श जारी है। उन्होंने जानकारी दी कि हरियाणा सरकार की एक आगामी सड़क निर्माण योजना के अंतर्गत नहर के दोनों किनारों पर नई सड़कों का विकास किया जाना है। इन्हीं प्रस्तावित सड़कों के निर्माण कार्य के साथ ही दोनों छोरों पर मजबूत बैरिकेडिंग लगाने की योजना पर भी मंथन चल रहा है। हालांकि, इस पूरी परियोजना के धरातल पर उतरने की कोई निश्चित समयसीमा अभी तक विभाग द्वारा स्पष्ट नहीं की गई है।
दूसरी ओर, स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि दीर्घकालिक सड़क परियोजनाओं के पूरा होने का इंतजार करने से कई और अनमोल जानें खतरे में पड़ सकती हैं। जनता की मांग है कि जब तक सड़क और बैरिकेडिंग का स्थायी कार्य शुरू नहीं होता, तब तक अत्यधिक जोखिम वाले प्वाइंट्स पर अस्थायी फेंसिंग, मजबूत चेतावनी बोर्ड, रात्रि प्रकाश की व्यवस्था और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों के डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएं ताकि त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके।
"नहर में डूबने से लोगों की जान जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन को बिना किसी देरी के दोनों किनारों पर सुरक्षा जाल लगवाना चाहिए, जिससे लोगों की सीधी पहुंच को रोका जा सके और हादसों पर रोक लग सके।" - विकास चौहान, स्थानीय निवासी
जनजीवन पर गहराता संकट और स्थायी समाधान की सख्त जरूरत
फरीदाबाद की इस जीवनदायिनी नहर के सुरक्षा प्रबंधों में ढिलाई का सीधा असर आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर पड़ रहा है। लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं ने नागरिकों को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि समय रहते सिंचाई विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई, तो यह जलमार्ग हादसों का केंद्र बना रहेगा।
अब यह देखना बेहद अहम होगा कि जिम्मेदार महकमे कब तक कागजी बैठकों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम शुरू करते हैं। आम जनता का साफ संदेश है कि सड़क निर्माण की आड़ में सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को नजरअंदाज न किया जाए, बल्कि फौरन सुरक्षा जाल और मजबूत बैरिकेडिंग स्थापित कर इंसानी जिंदगियों की रक्षा की जाए।





