हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): रोहतक के पीजीआईएमएस में मेडिकल सुपरीटेंडेंट के पद पर डॉ. कुंदन मित्तल की पुनर्नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
अब कोर्ट के आदेश पर डॉ. कुंदल मित्तल को पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी एंड इंटेंसिव केयर विभाग से भी रिलीव किया गया है।। इस बारे में हेल्थ यूनिवर्सिटी के पीआरओ डॉ. मंजूनाथ से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।। चिकित्सा निदेशक डॉ. कुंदन मित्तल 30 जून 2026 को रिटायर हो गए थे।। इसके बाद सरकार ने नियमों व निर्धारित आयु सीमा को दरकिनार करते हुए डॉ. कुंदन को 3 साल के लिए सेवा विस्तार दिया, जिसे डॉ. अनिल पन्निकर ने कोर्ट में चुनौती दी।।
| न्यायिक बिंदु | अदालत व मामले का विवरण |
|---|---|
| संबंधित न्यायालय / पीठ | रोहतक ज़िला एवं सत्र न्यायालय |
| मुकदमा / याचिका संदर्भ | रोहतक PGI में डॉ. मित्तल का MS पद से इस्तीफा |
| प्रमुख आंकड़े / राशि / तथ्य | 30 जून, 3 साल |
| अदालत का ताज़ा आदेश | संबंधित विभाग व प्रशासन द्वारा निगरानी जारी |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सितंबर 2026 में डॉ. मित्तल की एमएस पद पर दोबारा नियुक्ति पर रोक लगाई, जिसके बाद डॉ. मित्तल ने पद छोड़ दिया।। हाई कोर्ट के आदेश पर विभाग से हुई रवानगी हाईकोर्ट के आदेश पर डॉ. कुंदन मित्तल को पहले एमएस पद से इस्तीफा देना पड़ा और अब कोर्ट के आदेशों पर ही उन्हें संस्थान के बाल रोग विभाग व इंटेंसिव केयर से भी पूरी तरह रिलीव कर दिया गया है।। इस घटनाक्रम के साथ पीजीआईएमएस में री-एम्प्लॉयमेंट को लेकर जारी अन्य प्रशासनिक पदों पर भी कानूनी संकट गहरा गया है।। पुनर्नियुक्ति को लेकर मनीष ग्रोवर ने लिखा था पत्र पीजीआईएमएस में चिकित्सा अधीक्षक के पद पर कार्यरत रहे डॉ. कुंदन मित्तल की पुनर्नियुक्ति को लेकर पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने सीएम कार्यालय में पत्र लिखा था, जिसके बाद काफी विवाद हुआ।। मनीष ग्रोवर का पत्र काफी वायरल हुआ, जिसके बाद विवाद काफी बढ़ गया।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी प्रावधानों को गंभीरता से परखा गया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती निर्देश का सीधा प्रभाव केस की आगामी सुनवाई और आगे की कानूनी कार्यवाही पर पड़ेगा। संबंधित पक्षों की निगाहें अब अदालत के आगामी आदेशों पर टिकी हैं।
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आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।




