मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
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हरियाणा MBBS बॉन्ड पॉलिसी: दस्तावेजों को लेकर विवाद से 300 डॉक्टरों के PG एडमिशन खतरे में

हरियाणा के सैकड़ों मेडिकल ग्रेजुएट्स की पोस्टग्रेजुएट (PG) मेडिकल शिक्षा पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं. आरोप है कि राज्य प्रशासन ने उनके मूल दस्तावेज।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
27 अक्टूबर 2026 को 03:35 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा MBBS बॉन्ड पॉलिसी: दस्तावेजों को लेकर विवाद से 300 डॉक्टरों के PG एडमिशन खतरे में
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •हरियाणा के सैकड़ों मेडिकल ग्रेजुएट्स की पोस्टग्रेजुएट (PG) मेडिकल शिक्षा पर अनिश्चितत...
  • •प्रशासनिक व संबंधित विभाग ने मामले पर लिया त्वरित संज्ञान, जांच जारी।
  • •दिल्ली सहित प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर रखी जा रही है निरंतर नजर।
  • •विस्तृत तथ्यों व अग्रिम अपडेट्स के लिए दैनिक रियलिटी से जुड़े रहें।

हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): हरियाणा के सैकड़ों मेडिकल ग्रेजुएट्स की पोस्टग्रेजुएट (PG) मेडिकल शिक्षा पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं. आरोप है कि राज्य प्रशासन ने उनके मूल दस्तावेज (original documents) जारी नहीं किए हैं, जिससे NEET-PG काउंसलिंग के जरिए MD और MS कोर्सेज में उनके एडमिशन खतरे में पड़ गए हैं. छात्रों ने जताई चिंता : मंगलवार को ETV भारत से बात करते हुए, PG करने के इच्छुक डॉ. अक्षत मित्तल ने कहा कि, अगर हम अपने मूल प्रमाण पत्र (original certificates) न मिलने के कारण समय पर PG एडमिशन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते हैं, तो कम से कम 300 छात्रों का करियर का एक पूरा साल बर्बाद हो सकता है. खबरों के अनुसार, 2020 बैच के 300 से ज्यादा MBBS ग्रेजुएट्स ने NEET-PG परीक्षा पास कर ली है और PG कोर्सेज में सीटें भी हासिल कर ली हैं. हालांकि, हरियाणा की MBBS बॉन्ड पॉलिसी के चलते उनके मूल प्रमाण पत्र अभी भी प्रशासन के पास हैं, जिस वजह से कई छात्र अनिवार्य डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं. काउंसलिंग का पहला राउंड चल रहा है. छात्रों ने चिंता जताई है कि शैक्षणिक और पात्रता संबंधी सभी शर्तें पूरी करने के बावजूद, एक बेहद कठिन परीक्षा के जरिए हासिल की गई उनकी सीटें छिन सकती हैं.डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की आखिरी तारीख 2 नवंबर : डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की आखिरी तारीख 2 नवंबर है. चूंकि 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को वीकेंड (शनिवार-रविवार) पड़ रहा है, इसलिए प्रभावित छात्रों के पास अपने दस्तावेज हासिल करने और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए असल में 30 अक्टूबर तक का ही समय है. छात्रों का कहना है कि उन्होंने कई बार ईमेल के जरिए और अपने-अपने मेडिकल कॉलेजों के डीन (deans) के माध्यम से हरियाणा के डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (DMER) से संपर्क किया है. लेकिन उनका दावा है कि उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है.कोर्ट जाने पर विचार कर रहे छात्र : छात्रों के मुताबिक, मेडिकल कॉलेजों के डीन ने कहा है कि DMER के निर्देश के बिना वे मूल प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकते. इस वजह से छात्रों के पास इस गतिरोध को सुलझाने के लिए बहुत कम समय बचा है. प्रशासनिक स्तर पर कोई नतीजा न निकलने के कारण, अब छात्र तुरंत राहत पाने के लिए कोर्ट जाने पर विचार कर रहे हैं. इस विवाद ने हरियाणा की MBBS बॉन्ड नीति के क्रियान्वयन पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं. इस नीति को 2020 में लागू किया गया था और बाद में दिसंबर 2022 में इसमें संशोधन किया गया. इस नीति का उद्देश्य राज्य के लिए चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करना था, लेकिन ग्रेजुएट्स का कहना है कि रोजगार और सेवा व्यवस्था को लेकर स्पष्टता न होने के कारण उनके करियर की प्रगति पर असर पड़ रहा है.अधिक पारदर्शिता की जरूरत : लगभग 600 ग्रेजुएट्स का पहला बैच, जो इससे प्रभावित हुआ है, उसने फरवरी 2026 में अपना MBBS कोर्स पूरा किया. छात्रों के अनुसार, ग्रेजुएशन के आठ महीने बाद भी उन्हें बॉन्ड सेवा के लिए कोई औपचारिक रोजगार प्रस्ताव (ऑफर) नहीं मिला है. उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई है कि पहले बैच को समायोजित करने के लिए लगभग 3,000 अतिरिक्त (सुपरन्यूमरेरी) पद बनाने के सरकारी प्रस्ताव का क्या हुआ. मित्तल ने कहा, ऐसी बॉन्ड नीति, जिसमें सेवा देना अनिवार्य हो, उसके साथ एक पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, स्पष्ट सेवा शर्तें और नियुक्ति के लिए एक व्यावहारिक समय-सीमा होनी चाहिए. छात्रों ने बॉन्ड व्यवस्था से जुड़े बैंक लोन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि वित्तीय जिम्मेदारियों और रोजगार को लेकर अनिश्चितता के कारण अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता है.उच्च शिक्षा में बाधा ना बनें नीति : ग्रेजुएट्स ने गुजरात और तमिलनाडु में इसी तरह के विवादों में अदालती हस्तक्षेप का हवाला दिया है. उनका दावा है कि वहां अदालती निर्देशों ने उन छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाया, जो अपने दस्तावेज वापस पाना चाहते थे. हरियाणा की नीति पर इन फैसलों को किस हद तक लागू किया जा सकता है, यह कानूनी जांच का विषय है. छात्रों का कहना है कि वे जनसेवा से छूट नहीं मांग रहे हैं, बल्कि वे चाहते हैं कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि जब तक रोजगार के प्रावधान स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक यह नीति उनकी उच्च शिक्षा में बाधा न बने. गुजरात से हरियाणा आएगा निवेश, हरियाणा का प्रतिनिधिमंडल निवेशकों से करेगा संवाद MRP कौन तय करता है?। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।

मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?

गादी आइजेनकोट और नफ्ताली बेनेट से कितना बड़ा है मुकाबला?।

न्यायिक बिंदुअदालत व मामले का विवरण
संबंधित न्यायालय / पीठदिल्ली ज़िला एवं सत्र न्यायालय
मुकदमा / याचिका संदर्भहरियाणा MBBS बॉन्ड पॉलिसी
प्रमुख आंकड़े / राशि / तथ्य2 नवंबर, 31 अक्टूबर, 1 नवंबर, 30 अक्टूबर
अदालत का ताज़ा आदेशसंबंधित विभाग व प्रशासन द्वारा निगरानी जारी

अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?

विभागीय स्तर पर प्राथमिक जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और उच्चाधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी भेज दी गई है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों से भी आवश्यक जानकारी व साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी

स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर

न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी प्रावधानों को गंभीरता से परखा गया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती निर्देश का सीधा प्रभाव केस की आगामी सुनवाई और आगे की कानूनी कार्यवाही पर पड़ेगा। संबंधित पक्षों की निगाहें अब अदालत के आगामी आदेशों पर टिकी हैं।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है ताकि कानून व्यवस्था व जनसुविधा पूरी तरह चाक-चौबंद बनी रहे।

आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम

आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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