बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाकर मुंबई में अंजाम दी गई आपराधिक साजिश की परतें जैसे-जैसे उघड़ रही हैं, वैसे-वैसे हरियाणा के कई इलाके इस खतरनाक नेटवर्क के केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा (Special Cell) ने राज्य के सोनीपत जिले के बहालगढ़ क्षेत्र में दबिश देकर दो संदिग्ध महिलाओं को धर दबोचा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये दोनों महिलाएं देश की राजधानी और मायानगरी मुंबई के बीच सक्रिय एक बड़े सिंडिकेट के लिए हथियारों की आवाजाही का जरिया बनी हुई थीं। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है क्योंकि अपराधियों द्वारा अब कूरियर के रूप में महिलाओं का इस्तेमाल किए जाने का पैटर्न खुलकर सामने आ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस के हत्थे चढ़ी दोनों महिलाओं की पहचान राधा और बबीता के तौर पर हुई है, जो पिछले कुछ समय से बहालगढ़ इलाके में किराए का मकान लेकर अकेली रह रही थीं। खुफिया तंत्र से मिले इनपुट्स के आधार पर यह कार्रवाई तब अमल में लाई गई जब ये दोनों संदिग्ध दिल्ली लौटी थीं। सूत्रों का दावा है कि टाइगर श्रॉफ पर हमले की वारदात को अमलीजामा पहनाने से ठीक पहले इन दोनों ने ट्रेन के माध्यम से हथियारों के बक्से या खेप को मुंबई तक पहुंचाया था और वहां स्थानीय स्तर पर सक्रिय एक हैंडलर को यह खतरनाक सामग्री सौंपी थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस यात्रा के दौरान उनके संपर्क में कौन- کون से लोग आए थे और उन्हें यह खेप किसने सौंपी थी।
आपराधिक साठगांठ और रोहणा गांव तक पहुंचे जांच के तार
इस पूरे मामले की कड़ियों को आपस में जोड़ते हुए जांच अधिकारियों ने आगे की कार्रवाई तेज कर दी है। राधा और बबीता से लंबी पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस टीम ने सोनीपत के ही रोहणा गांव में छापा मारा और वहां से कुणाल तथा सुमित नामक दो युवकों को अपनी हिरासत में ले लिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मुख्य रूप से कुणाल इस पूरी साजिश में एक अहम कड़ी माना जा रहा है। उसके आपराधिक इतिहास को खंगालने पर पता चला है कि उस पर पहले से ही करीब आठ संगीन मुकदमे दर्ज हैं, जो उसकी दुर्दांत प्रवृत्ति की ओर इशारा करते हैं।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कुणाल पानीपत के एक अन्य कुख्यात शख्स अनिल पंडित का बेहद करीबी सहयोगी है। ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है कि अनिल पंडित के इशारे पर ही रोहणा गांव के इन युवकों ने हथियारों का इंतजाम किया और उन्हें मुंबई भेजने के लिए राधा और बबीता को बतौर कूरियर इस्तेमाल किया। कुणाल के साथ पकड़े गए सुमित के बारे में भी पुलिस गहनता से छानबीन कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस सिंडिकेट में उसकी क्या भूमिका थी। हालांकि कुणाल की शैक्षिक योग्यता केवल दसवीं कक्षा तक की बताई जा रही है, लेकिन अपराध की दुनिया में उसकी पहुंच और नेटवर्क काफी फैला हुआ प्रतीत होता है।
| गिरफ्तार आरोपी का नाम | निवास / कार्यक्षेत्र | आपराधिक पृष्ठभूमि व भूमिका |
|---|---|---|
| राधा | बहालगढ़ (मूल निवासी अज्ञात) | लॉरेंस गैंग के लिए कूरियर, ट्रेन से हथियार मुंबई पहुंचाई |
| बबीता | बहालगढ़ (मूल निवासी अज्ञात) | लॉरेंस गैंग के लिए कूरियर, हथियारों की डिलीवरी में शामिल |
| कुणाल | गांव रोहणा, सोनीपत | 8 पुराने मुकदमे दर्ज, पानीपत के अनिल पंडित का करीबी |
| सुमित | गांव रोहणा, सोनीपत | कुणाल का साथी, नेटवर्क में भूमिका की जांच जारी |
सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली और गैंग्स के नए तौर-तरीके
इस हाई-प्रोकॉइल मामले की जांच कर रही विशेष सेल ने संकेत दिए हैं कि यह नेटवर्क केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई राज्यों में फैले हुए हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन अपराधियों को अत्याधुनिक हथियार कहां से और किस माध्यम से मिल रहे थे। लॉरेंस बिश्नोई या अन्य कुख्यात गिरोहों द्वारा अब महिलाओं और कम पढ़े-लिखे स्थानीय युवकों को इस तरह के संवेदनशील कामों में झोंकने की रणनीति सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के प्यादों का इस्तेमाल करके असली मास्टरमाइंड कानून की पकड़ से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन अब तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से इस पूरे नेक्सेस को ध्वस्त किया जा रहा है।
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों से केंद्रीय और राज्य की खुफिया एजेंसियां भी अलग-अलग दौर की पूछताछ कर रही हैं। यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या टाइगर श्रॉफ के अलावा किसी अन्य हस्ती को भी निशाना बनाने की योजना थी या नहीं। पुलिस द्वारा जुटाई जा रही डिजिटल साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद है। अदालत में पेश कर इन आरोपियों का रिमांड बढ़ाया जा सकता है ताकि हथियारों के इस अवैध स्रोत तक पहुंचा जा सके।
"इस पूरे सिंडिकेट का दायरा काफी बड़ा है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार महिलाएं कूरियर का काम कर रही थीं और उन्होंने ही हथियारों की खेप मुंबई पहुंचाई थी। कुणाल और उसके साथियों की संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण मिले हैं, और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को भी जल्द बेनकाब किया जाएगा।" - पुलिस सूत्र, दिल्ली विशेष सेल
स्थानीय जनजीवन और कानून व्यवस्था पर पड़ता असर
इस घटना के सामने आने के बाद से हरियाणा की जीटी रोड बेल्ट, विशेषकर सोनीपत, पानीपत और रोहणा क्षेत्र के आम नागरिकों में खासी चर्चा और चिंता का माहौल है। जिस प्रकार शांत समझे जाने वाले ग्रामीण इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों के किराए के मकानों का इस्तेमाल अपराधी अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कर रहे हैं, उससे स्थानीय प्रशासन और मकान मालिकों की जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या बहालगढ़ में किराए पर रहने वाले लोगों का पुलिस सत्यापन (Police Verification) कराया गया था या नहीं।
क्षेत्र के गणमान्य लोगों और आम जनता का मानना है कि इस तरह के आपराधिक तत्वों की मौजूदगी से हरियाणा की छवि धूमिल होती है। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी से यह साफ हो गया है कि राज्य को अपराधियों की शरणस्थली नहीं बनने दिया जाएगा। स्थानीय पुलिस थानों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में किराएदारों और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें ताकि किसी भी बड़े षड्यंत्र को समय रहते नाकाम किया जा सके।
कानूनी शिकंजा और आगामी प्रशासनिक कदम
आगामी दिनों में इस मामले की जांच का दायरा और अधिक विस्तृत होने की संभावना है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से यह उगलवाने का प्रयास होगा कि उन्होंने अब तक ऐसे कितने हथियारों की खेप अन्य राज्यों में पहुंचाई है। अदालत के माध्यम से इन आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। प्रशासन और सुरक्षा बल मिलकर यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि इस पूरे सिंडिकेट के हर एक मोहरे को सजा दिलाई जा सके और देश में शांति व्यवस्था को खंडित करने वाले अपराधियों के मंसूबों पर पूरी तरह पानी फेरा जा सके।





