साइबर सिटी गुरुग्राम में ठगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे प्रतिष्ठित हस्तियों के परिवारों को भी अपना निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं। ताजा मामला मशहूर सोशल एक्टिविस्ट और फिल्म मेकर दीपिका नारायण भारद्वाज के परिवार से जुड़ा है। दीपिका के बुजुर्ग पिता, जो हरियाणा सरकार में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हैं, एक बेहद शातिर ऑनलाइन स्कैम का शिकार हो गए हैं। ठगों ने बड़ी चालाकी से उनकी पत्नी के इलाज के नाम पर उन्हें जाल में फंसाया और बैंक खाते से ₹16,000 की राशि पार कर दी।
घटना की शुरुआत 5 अक्टूबर को हुई जब सत्य नारायण भारद्वाज अपनी पत्नी की आंखों के उपचार के लिए शहर के एक नामी डॉक्टर की अपॉइंटमेंट लेने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने गूगल सर्च इंजन पर डॉक्टर का संपर्क नंबर खोजा, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर दिख रहा नंबर किसी अस्पताल का नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों द्वारा तैयार की गई एक फर्जी वेबसाइट का था। ठगों ने 'सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन' (SEO) का सहारा लेकर अपनी फर्जी साइट को टॉप पर रैंक कराया हुआ था, ताकि लोग आसानी से उनके झांसे में आ सकें।
रिमोट एक्सेस ऐप के जरिए फोन का कंट्रोल लिया
जैसे ही पीड़ित ने उस संदिग्ध नंबर पर कॉल किया, दूसरी तरफ मौजूद ठग ने खुद को अस्पताल का प्रतिनिधि बताते हुए बेहद पेशेवर तरीके से बात की। उसने डॉक्टर की फीस जमा करने के बहाने पीड़ित को व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा और एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने को कहा। यह ऐप असल में एक 'स्क्रीन शेयरिंग' वायरस था। जैसे ही बुजुर्ग ने इसे इंस्टॉल किया, उनके फोन का पूरा नियंत्रण हैकर्स के पास चला गया। इसके बाद उनके बैंकिंग पासवर्ड, ओटीपी और मैसेजेस सीधे ठगों की स्क्रीन पर लाइव दिखने लगे।
| विवरण | तथ्यात्मक जानकारी |
|---|---|
| मुख्य पीड़ित | सत्य नारायण भारद्वाज (रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) |
| घटना स्थल | गुरुग्राम, हरियाणा |
| ठगी की कुल राशि | ₹16,000 (दो किस्तों में) |
| ठगी का माध्यम | फर्जी गूगल हेल्पलाइन व स्क्रीन शेयरिंग ऐप |
| ट्रांजेक्शन का गंतव्य | जयपुर, राजस्थान (बैंक खाता विवरण) |
| मुख्य शिकायतकर्ता | दीपिका नारायण भारद्वाज (सोशल एक्टिविस्ट) |
खाता फ्रीज होने के बाद भी हुई निकासी, सुरक्षा पर उठे सवाल
पीड़ित की पत्नी को संदेह होने पर उन्होंने तुरंत अपनी बेटी दीपिका को सूचित किया। दीपिका ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्ध नंबरों को ब्लॉक किया, ऐप अनइंस्टॉल किया और बैंक खाते को तुरंत फ्रीज करवा दिया। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह रही कि खाता फ्रीज होने के बावजूद 13 अक्टूबर को सुबह-सुबह उनके बैंक खाते से पैसे काट लिए गए। दीपिका के अनुसार, उनके पिता को न तो कोई ओटीपी मिला और न ही ट्रांजेक्शन का कोई अलर्ट मैसेज आया। जांच में पता चला है कि यह राशि जयपुर के किसी व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर हुई है।
"मेरे पिता ने अपनी पत्नी की आंखों के चेकअप के लिए डॉक्टर ढूंढने की कोशिश की और ठगों ने उन्हें लूट लिया। हमने साइबर सेल और बैंक में शिकायत की है, लेकिन जिस तरह से खाता फ्रीज होने के बाद भी पैसे कटे, वह बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।" - दीपिका नारायण भारद्वाज (फिल्म मेकर)
साइबर सेल और पुलिस की कार्रवाई पर निराशा
दीपिका नारायण भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 'cybercrime.gov.in' पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी समाधान नहीं मिला है। उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी मामला दर्ज कराने की बात कही है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में बुजुर्ग नागरिक सबसे अधिक असुरक्षित हैं। साइबर अपराधी अब केवल तकनीकी खामियों का नहीं, बल्कि लोगों की मजबूरी और विश्वास का भी फायदा उठा रहे हैं।
सावधानी ही बचाव है: विशेषज्ञों की सलाह
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि गूगल पर मिलने वाले किसी भी रैंडम नंबर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) का ही उपयोग करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन में स्क्रीन शेयरिंग ऐप जैसे AnyDesk या TeamViewer डाउनलोड न करें। यदि आपके साथ ठगी होती है, तो तुरंत 1930 डायल करें और संबंधित बैंक को सूचित करें।





