हरियाणा के फतेहाबाद जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले तहसील चौक क्षेत्र में एक पारिवारिक विवाद ने खूनी रूप ले लिया, जहां पारिवारिक कलह और मानसिक बीमारी के चलते एक पिता को अपनी जान गंवानी पड़ी। डेरेवाला मोहल्ले में हुई इस वीभत्स घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। बुधवार दोपहर को हुई इस वारदात के दौरान एक युवक ने अपने ही 60 वर्षीय पिता पर घातक हथियार से हमला बोल दिया, जिससे बुजुर्ग गंभीर रूप से लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। अचानक हुए इस खूनी संघर्ष के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग सहम गए। परिजनों द्वारा आनन-फानन में घायल वृद्ध को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है और स्थानीय नागरिकों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले के केंद्र में मृतक का छोटा बेटा विजय है, जो पिछले काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहा था। मृतक धर्मपाल और उनका परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता था और अपनी आजीविका चलाने के लिए काफी संघर्ष कर रहा था। मृत बुजुर्ग स्वयं एक होटल पर काम करके परिवार के भरण-पोषण में हाथ बंटाते थे, जबकि उनका छोटा बेटा विजय मजदूरी के जरिए अपना जीवनयापन कर रहा था। आर्थिक तंगी और गरीबी के इस दौर में परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब विजय की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। परिवार के मुताबिक, उसे लगातार मिर्गी के दौरे आ रहे थे, जिसके कारण उसका व्यवहार भी असामान्य होने लगा था। पैसे के अभाव के कारण पीड़ित का सही और नियमित इलाज नहीं हो पा रहा था, जो अंततः इस बड़ी त्रासदी का कारण बन गया।
घटना का सिलसिलेवार घटनाक्रम और चश्मदीदों के खुलासे
बुधवार दोपहर को डेरेवाला मोहल्ले में अचानक चीख-पुकार गूंज उठी, जिससे आसपास के घरों में हड़कंप मच गया। घटना के वक्त मृतक का बड़ा बेटा सतीश अपने काम में व्यस्त था। प्रत्यक्षदर्शियों और पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, सतीश को उनके ही परिवार के एक अन्य सदस्य ने आकर इस खूनी हमले की सूचना दी थी। संदेश मिलते ही सतीश तुरंत दौड़ते हुए अपने घर पहुंचे, जहां उन्होंने अपने पिता धर्मपाल को खून से लथपथ और अचेत अवस्था में पड़े देखा। बुजुर्ग के सिर पर तेजधार हथियार से गहरे वार किए गए थे, जिसके कारण अत्यधिक रक्तस्त्राव हो चुका था। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए परिजनों ने बिना एक पल गंवाए घायल अवस्था में ही वृद्ध को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना किया, लेकिन डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद उनकी सांसें थम चुकी थीं।
इस दर्दनाक वाकये ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है। मोहल्लेवासियों का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इस घर में इस तरह की कोई अनहोनी हो जाएगी। वारदात की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस इकाई भी हरकत में आ गई और फौरन घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने शुरू किए। फॉरेंसिक टीम ने भी मौके का मुआयना किया और हत्या में प्रयुक्त हथियार को अपने कब्जे में लेने के प्रयास किए। बड़े बेटे सतीश द्वारा दी गई शुरुआती गवाही के आधार पर पुलिस यह मानकर चल रही है कि मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण यह आवेश में उठाया गया कदम था, हालांकि पुलिस हर संभावित एंगल से गहराई से छानबीन कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
| तथ्य एवं विवरण | विस्तृत जानकारी |
|---|---|
| घटना का स्थान | तहसील चौक, डेरेवाला मोहल्ला, फतेहाबाद |
| मृतक का नाम एवं आयु | धर्मपाल (उम्र करीब 60 वर्ष) |
| आरोपी का नाम | विजय (छोटा बेटा, अविवाहित, मजदूरी) |
| शिकायतकर्ता | सतीश (बड़ा बेटा) |
| मुख्य कारण | गंभीर बीमारी (मिर्गी के दौरे) व आर्थिक तंगी |
| घटना का समय | बुधवार दोपहर |
पुलिस की प्रारंभिक जांच और कानूनी कार्रवाई की दिशा
घटना की गंभीरता को देखते हुए फतेहाबाद पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय थाना पुलिस ने मृतक के बड़े बेटे सतीश के बयानों को आधार बनाकर आगामी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चूंकि आरोपी युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है और उसे मिर्गी के गंभीर दौरे पड़ते थे, इसलिए उसके चिकित्सीय इतिहास और दस्तावेजों को भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि क्या वाक़ई बीमारी के आवेग में यह खूनी कदम उठाया गया या इसके पीछे कोई अन्य पारिवारिक विवाद भी था। इसके साथ ही, शव को अपने कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल के मोर्चरी हाउस में पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है, ताकि मौत के स्पष्ट कारणों की पुष्टि हो सके।
जांच अधिकारियों का यह भी मानना है कि यदि कोई व्यक्ति गंभीर मानसिक या शारीरिक बीमारी से पीड़ित है और उसके पास इलाज के साधन नहीं हैं, तो ऐसे मामलों में सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता होती है। पुलिस आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है ताकि पिछले कुछ दिनों में पिता और पुत्र के बीच हुई किसी भी अनबन या तनाव के बारे में सटीक जानकारी मिल सके। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से घटनास्थल से फिंगरप्रिंट्स और अन्य भौतिक साक्ष्य जुटाए गए हैं, जिन्हें लैबोरेटरी परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। पुलिस का शिकंजा कसने के साथ ही इस सनसनीखेज मामले में आगे की धाराओं के तहत औपचारिक मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
"हमें हमारे एक परिजन ने आकर बताया कि छोटे भाई विजय ने दादा यानी मेरे पिता को चोट मार दी है। जब मैं भागकर घर पहुंचा तो पिता गंभीर रूप से घायल पड़े थे। विजय को पिछले काफी समय से मिर्गी के दौरे पड़ रहे थे और गरीबी के कारण हम उसका सही इलाज नहीं करवा पा रहे थे।" - सतीश, मृतक का बड़ा बेटा
पारिवारिक तंगी, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और स्थानीय जनजीवन पर असर
इस वीभत्स घटना ने समाज के एक बेहद संवेदनशील पहलू को उजागर किया है, जो मानसिक स्वास्थ्य और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से जुड़ा हुआ है। फतेहाबाद के इस साधारण मोहल्ले में घटी इस दुर्घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि किस प्रकार उचित चिकित्सा और काउंसलिंग के अभाव में एक हंसता-खेलता परिवार तबाह हो सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मानसिक बीमारियों का इलाज कराना आज भी एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है। जब दिहाड़ी मजदूरी करके दो वक्त की रोटी जुटाने वाले परिवारों में कोई सदस्य गंभीर मानसिक रोग या मिर्गी जैसी समस्याओं से घिर जाता है, तो संसाधनों की कमी के चलते स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगती है।
इस मार्मिक वारदात के बाद डेरेवाला मोहल्ला और आसपास के क्षेत्र में मातम के साथ-साथ एक अनजाना डर भी व्याप्त हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं दर्शाती हैं कि हमें अपने आस-पास के लोगों और विशेषकर मानसिक रूप से संघर्ष कर रहे युवाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभागों को भी ऐसी बस्तियों में विशेष जागरूकता शिविर लगाने चाहिए ताकि समय रहते जरूरतमंदों को चिकित्सीय सहायता मिल सके। बहरहाल, पिता की मौत और छोटे बेटे के इस कृत्य ने पूरे परिवार को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां हर कोई इस बात से दुखी है कि यदि समय पर बीमारी का इलाज मिल जाता, तो शायद यह अनहोनी टाली जा सकती थी।





