हरियाणा के फतेहाबाद जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां पुरानी तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक रिहायशी इलाके में पारिवारिक कलश ने खूनी रूप अख्तियार कर लिया। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे एक छोटे बेटे ने मामूली सी बात पर उपजे विवाद के दौरान गुस्से में आकर अपने ही 61 वर्षीय बुजुर्ग पिता को मौत के घाट उतार दिया। इस जघन्य वारदात के बाद से न केवल पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है, बल्कि स्थानीय निवासियों के बीच भी भारी दहशत और सनसनी फैल गई है। पुलिस प्रशासन इस मामले की गंभीरता को समझते हुए हर पहलू से छानबीन कर रहा है।
घटना के समय की पृष्ठभूमि का आकलन करें तो यह परिवार किराये के मकान में जीवन गुजार रहा है। मृतक की पहचान धर्मपाल के रूप में हुई है, जिनके परिवार में दो बेटे सतीश (बड़ा) और विजय (छोटा) के अलावा एक विवाहित बेटी भी है। बड़ा बेटा सतीश अपनी आजीविका चलाने के लिए पास की ही एक किराने की दुकान पर नौकरी करता है। जिस वक्त यह त्रासद घटना घटी, उस दौरान घर के भीतर धर्मपाल और उनका छोटा बेटा विजय ही मौजूद थे, जबकि घर की महिला सदस्य स्नान करने में व्यस्त थीं। मामूली तनातनी ने इतनी भयानक शक्ल ले ली कि किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि एक हंसता-खेलता परिवार पल भर में बिखर जाएगा।
मामूली तकरार से शुरू हुआ विवाद और पोती की गवाही
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 34 वर्षीय विजय और उसके पिता धर्मपाल के बीच किसी घरेलू बात को लेकर अचानक तीखी बहस छिड़ गई। मानसिक अस्थिरता और अत्यधिक क्रोध के आवेश में डूबे विजय ने नियंत्रण खो दिया और घर के अंदर ही रखी एक मजबूत लकड़ी उठाकर अपने पिता के सिर पर ताबड़तोड़ प्रहार करने शुरू कर दिए। बुजुर्ग धर्मपाल संभल पाते या बचाव में कुछ कर पाते, उससे पहले ही वे गंभीर रूप से लहूलुहान होकर फर्श पर अचेत होकर गिर पड़े। इस दिल दहला देने वाली घटना के दौरान घर में मौजूद सतीश की नन्हीं बेटी ने जब यह खौफनाक मंजर देखा, तो वह बुरी तरह सहम गई।
घबराई हुई बच्ची तुरंत दौड़ते हुए पास की उस किराने की दुकान पर पहुंची जहां उसका पिता सतीश काम कर रहा था। बच्ची ने कांपते हुए लहजे में सतीश को बताया कि उसके चाचा ने उसके दादा पर हमला कर उनकी जान ले ली है। इस अप्रत्याशित सूचना से सतीश के पैरों तले जमीन खिसक गई और वह बदहवास हालत में तुरंत दौड़ते हुए अपने घर की तरफ भागा। घर के भीतर प्रवेश करते ही उसने अपने पिता को खून से लथपथ और अदम्य अवस्था में पड़ा पाया। इसके बाद तुरंत पड़ोसियों और पुलिस को इस अनहोनी की जानकारी दी गई, जिसके बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया।
| तथ्य विवरण | विवरण विवरण / जानकारी |
|---|---|
| घटना का स्थान | पुरानी तहसील इलाका, फतेहाबाद, हरियाणा |
| मृतक का नाम | धर्मपाल (आयु: 61 वर्ष) |
| आरोपी का नाम | विजय (आयु: 34 वर्ष, छोटा बेटा) |
| सूचना देने वाला | मृतक की पोती एवं बड़ा बेटा सतीश |
| चिकित्सा सहायता | नागरिक अस्पताल, फतेहाबाद |
| जांच अधिकारी | संजय मोरवाल (सिटी थाना प्रभारी) |
पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और साक्ष्य संकलन
घटना की भनक लगते ही फतेहाबाद सिटी थाना प्रभारी संजय मोरवाल अपनी पुलिस टीम और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के साथ फौरन घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस बल ने सबसे पहले घायल बुजुर्ग को स्थानीय नागरिकों की सहायता से तुरंत फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल पहुंचाया, जहां आपातकालीन कक्ष में तैनात चिकित्सकों ने गहराई से परीक्षण के बाद धर्मपाल को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार सिर पर गंभीर और गहरे प्रहार होने के कारण अत्यधिक रक्तस्त्राव उनकी मौत का मुख्य कारण बना। अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
सिटी थाना पुलिस ने मौके का मुआयना कर वहां मौजूद साक्ष्यों को अपने कब्जे में ले लिया है और मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया है। मृतक के बड़े बेटे सतीश ने पुलिस के समक्ष अपने आधिकारिक बयान दर्ज कराते हुए बताया कि उसका छोटा भाई विजय पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ और अत्यधिक तनाव में चल रहा था। मानसिक असंतुलन के कारण वह अक्सर बिना किसी ठोस वजह के घर में कलह करता था और हर किसी से उलझ जाता था। पुलिस ने इस बयान को आधार बनाते हुए कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है और फरार चल रहे आरोपी बेटे की धरपकड़ के लिए विभिन्न संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
"मृतक के परिजनों की शिकायत और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मानसिक रूप से परेशान बताए जा रहे आरोपी बेटे की तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हैं, जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।" - संजय मोरवाल, थाना प्रभारी, सिटी फतेहाबाद
मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवादहीनता पर गहराता संकट
इस वीभत्स घटना ने एक बार फिर समाज के उन पहलुओं को उजागर कर दिया है जिन पर अक्सर हमारा ध्यान नहीं जाता। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और आर्थिक तंगी के बीच मानसिक स्वास्थ्य जैसी गंभीर समस्याएं किस तरह परिवारों के भीतर जहर घोल रही हैं, यह इसका एक भयावह उदाहरण है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक अवसाद और असामायिक क्रोध से जूझ रहे व्यक्तियों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श और पारिवारिक संबल न मिलना इस तरह की त्रासदियों को जन्म देता है। एक तरफ जहां एक बुजुर्ग पिता की इस तरह अर्थी उठने की नौबत आ गई है, वहीं दूसरी तरफ दूसरा बेटा कानून के शिकंजे में फंसकर अपना पूरा भविष्य बर्बाद कर चुका है।
स्थानीय स्तर पर भी इस घटना के बाद से शोक और आश्चर्य का माहौल है। पड़ोसियों का कहना है कि यदि परिवार में पनप रहे मानसिक तनाव या आपसी कलह को समय रहते पहचानकर किसी पेशेवर मनोचिकित्सक की मदद ली जाती, तो शायद यह अनर्थ रोका जा सकता था। समाज में बढ़ती असहिष्णुता और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी अब घरों के भीतर अपनों की जान लेने लगी है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों के लिए यह सोचने का विषय है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए किस प्रकार जमीनी स्तर पर काउंसलिंग और सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह के वज्राघात का सामना न करना पड़े।





