राज्य के अन्नदाताओं को पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकालकर अधिक मुनाफा देने वाली बागवानी पद्धतियों की ओर आकर्षित करने के लिए प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है। इसी कड़ी में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र की रूपरेखा तैयार की गई है, जो उन भूमिपुत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा जो अपनी आय में गुणात्मक वृद्धि करना चाहते हैं। इस पहल के तहत राज्यभर के प्रगतिशील कृषकों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से रूबरू कराया जाएगा ताकि वे बाजार की बदलती मांगों के अनुरूप अपनी पैदाوار को ढाल सकें।
यह पांच दिवसीय आवासीय व गैर-आवासीय दक्षता विकास कार्यक्रम झज्जर जिले के सुदूर मुनीमपुर क्षेत्र में स्थित प्रतिष्ठित पुष्प एवं बीज उत्पादन तकनीकी उत्कृष्टता केंद्र में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन की समय-सारणी 26 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक निर्धारित की गई है। इस दौरान कृषि विज्ञान से जुड़े प्रतिष्ठित विशेषज्ञ और वैज्ञानिक प्रतिभागियों को पुष्प उत्पादन के विभिन्न चरणों, जैसे मृदा परीक्षण, उन्नत बीजों के चयन, ग्रीनहाउस प्रबंधन और कीट नियंत्रण की बारीकियों से अवगत कराएंगे।
प्रशिक्षण का पूरा विवरण और कार्यक्रम की रूपरेखा
| विवरण | तथ्य एवं जानकारी |
|---|---|
| प्रशिक्षण स्थल | फ्लोरल एंड सीड प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मुनीमपुर, झज्जर |
| प्रशिक्षण अवधि | 26 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2026 (पाँच दिवसीय) |
| कुल चयनित सीटें | केवल 10 प्रगतिशील किसानों के लिए सीमित अवसर |
| आवेदन की अंतिम तिथि | 23 अक्टूबर 2026 (दोपहर 2:00 बजे तक) |
| पंजीकरण माध्यम | आधिकारिक कौशल पोर्टल (kaushal.hortharyana.gov.in) |
इस अनूठी कार्यशाला में शिरकत करने के लिए चयन प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और सीमित रखा गया है, जिसके तहत केवल 10 योग्य कृषकों को ही इस सत्र का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। सीमित सीटें होने का मुख्य कारण प्रत्येक प्रतिभागी को व्यक्तिगत रूप से व्यावहारिक प्रशिक्षण देना और उनकी शंकाओं का मौके पर ही समाधान करना है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नामांकित उम्मीदवारों को केंद्र पर आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन दिखाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक गेहूं और धान के फसल चक्र से इतर अब समय आ गया है कि राज्य का कृषक वर्ग मूल्य संवर्धित फसलों की तरफ रुख करे। फूलों की वैश्विक और स्थानीय बाजार में लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए यह क्षेत्र रोजगार और आजीविका के नए द्वार खोल रहा है। उद्यान विभाग की ओर से इस प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रमों का संचालन इसलिए किया जा रहा है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान की जा सके।
उद्यान विभाग की भूमिका और प्रशासनिक दिशा-निर्देश
हरियाणा राज्य कृषि एवं उद्यानिकी विभाग लगातार ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहा है जिससे किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिले और वे सीधे तौर पर अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें। इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न अनुदान योजनाओं, सब्सिडी प्रावधानों और वित्तीय सहायता की जानकारियों का विवरण भी साझा करेंगे। इससे किसानों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में आसानी होगी और वे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर हो सकेंगे।
आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है ताकि दूर-दराज के इलाकों में बैठे लोग भी आसानी से इसका हिस्सा बन सकें। इसके लिए राज्य सरकार के आधिकारिक हॉर्टिकल्चर कौशल पोर्टल का उपयोग करना होगा। विभाग के तकनीकी प्रकोष्ठ ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर निर्धारित समय-सीमा यानी 23 अक्टूबर की दोपहर दो बजे के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
"हरियाणा में बागवानी फसलों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। हमारा मुख्य लक्ष्य किसानों को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करना है ताकि वे फूलों की खेती को एक व्यावसायिक रूप देकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकें। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।" - उद्यान विभाग प्रवक्ता
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि विविधीकरण पर व्यापक प्रभाव
इस प्रकार के कौशल उन्नयन कार्यक्रमों का दूरगामी प्रभाव राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलता है। जब किसान पारंपरिक फसलों के बजाय फूलों और सुगंधित पौधों की खेती की तरफ मुड़ते हैं, तो भूमि की उर्वरता बनी रहने के साथ-साथ जल संरक्षण में भी मदद मिलती है। इसके अलावा, फूलों की खेती श्रम प्रधान होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करती है, जिससे पलायन की समस्या पर भी अंकुश लगता है।
प्रशासन का यह कदम उन युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है जो कृषि को आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। आने वाले दिनों में विभाग द्वारा इस तरह के कई अन्य जनहितैषी कार्यक्रम राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित किए जाने की योजना है, जिससे अधिक से अधिक संख्या में लोग लाभांवित हो सकें और हरियाणा कृषि के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम कर सके।





